इजरायल में संसदीय (नेसेट) चुनाव हुए हैं और 1999 के बाद पहली बार सबसे ज्यादा 77.7 प्रतिशत मतदान हुआ, जो साल 2022 की तुलना में 7.1 प्रतिशत ज्यादा है. सरकार बनाने के लिए नेसेट की 120 में से 61 सीटों का बहुमत चाहिए, लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़ों में इस बार किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और बेंजामिन नेतन्याहू चुनाव हार रहे हैं. 30 अक्टूबर को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पता चलेगा कि इजरायल में फिर से नेतन्याहू की सरकार बन रही है या नहीं. लेकिन अगर नेतन्याहू चुनाव हार गए तो भारत से इजरायल के संबंधों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू का तालमेल मजबूत है, लेकिन भारत सरकार को इजरायल की नई सरकार से नए सिरे से कूटनीतिक और व्यक्तिगत संबंध बनाने होंगे.
भारत से रिश्ते-व्यापार और मजबूत होने की उम्मीद
एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, अगर बेंजामिन नेतन्याहू संसदीय चुनाव में हार गए तो भारत के साथ इजरायल के संबंधों पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. भारत और इजरायल के बीच 16 समझौते हुए हैं, जिन्हें नई सरकार लागू रख सकती है. इजरायल ने भारत के करीब 50000 श्रमिकों को वर्क वीजा देने का ऐलान किया हुआ है, जिसे नई सरकार पूरा कर सकती है. कृषि, जल प्रबंधन, AI और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए दोनों देश समझौता कर चुके हैं, जिन्हें नई सरकार प्राथमिकता दे सकती है. इजरायल से भारत को आधुनिक रक्षा उपकरण, ड्रोन, एयर डिफेंस और साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी मिलती है, जो मिलती रह सकती है. भारत को उम्मीद है कि अगर नेतन्याहू सत्ता में नहीं आए तो भी इजरायल की नई सरकार भारत के रिश्ते और मजबूत बनाने की दिशा में ही काम करेगी.
नई सरकार रिश्ते तोड़ने का जोखिम नहीं उठाएगी
बता दें कि भारत और इजरायल के राजनीतिक, राजनयिक, आर्थिक, व्यापारिक, तकनीकी, रक्षा और सामरिक संबंध काफी पुराने होने के साथ-साथ मजबूत हैं. भारत और इजरायल के रक्षा और तकनीक संबंध सिर्फ एक राष्ट्राध्यक्षों के भरोसे नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों की सेना, सरकारी संस्थान और कंपनियां भी संस्थागत समझौते करती हैं. इतने बड़े और ज्यादा समझौतों को एकदम से तोड़ना संभव नहीं है, इसलिए इजरायल के साथ रक्षा प्रोजेक्ट जारी रहने की उम्मीद है. भारत की कूटनीति इजरायल और पश्चिम एशिया यानी खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को बैलेंस करने की रही है. अगर इजरायल की नई सरकार क्षेत्रीय तनाव को कम करने या कूटनीति पर जोर देगी तो भारत को फायदा होगा. भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों से इजरायल का फायदा होगा.
भारत और इजरायल में द्विपक्षीय व्यापार समझौता
भारत और इजरायल के बीच जुलाई 2026 में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ था. इस साल दोनों के बीच पहले दौर की व्यापार वार्ता 23 से 26 फरवरी 2026 के बीच नई दिल्ली में हुई थी. दूसरे दौर की वार्ता 20 से 23 जुलाई 2026 के बीच नई दिल्ली में हुई थी. भारत और इजरायल के बीच 8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जो आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है और इस समझौते ने 2017 में खत्म किए गए 1996 के समझौते को रिप्लेस किया. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और इजरायल में 3.93 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ था. भारत से इजरायल इंजीनियरिंग का सामान, रसायन, कपड़ा और मशीनरी का निर्यात किया जाता है. वहीं इजरायल से भारत रसायन, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों का आयात करता है.