Israel Election 2026: इजरायल में 27 अक्टूबर को एक अहम संसदीय चुनाव हो रहा है, जिसमें तकरीबन 73 लाख एलिजिबल वोटर्स 120 सदस्यीय ‘नेसेट’ (इजरायली संसद) के लिए अपने प्रतिनिधि चुनेंगे. ये चुनाव राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य सेवा, 7 अक्टूबर 2023 को हमास की तरफ से किए गए हमलों और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही बहसों के बीच हो रहा है. इस चुनाव में कुल 36 पार्टियां हिस्सा ले रही हैं. हालांकि इजरायल के प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन प्रॉसेस के कारण, सबसे ज्यादा सीटें जीतने का मतलब ये नहीं है कि सरकार बन ही जाएगी.
मतदान और नतीजों की टाइमिंग
इजरायल में स्थानीय समयानुसार सुबह 7 बजे मतदान केंद्र खुल गए और ज्यादातर सेंटर्स पर रात 10 बजे तक मतदान चलेगा. मतदान खत्म होने के बाद एग्जिट पोल आएंगे, जिनसे पार्टियों के प्रदर्शन का शुरुआती संकेत मिल सकेगा. इसके बाद वोटों की गिनती होगी और तय शेड्यूल के मुताबिक, 4 नवंबर 2026 तक आधिकारिक नतीजे आने की उम्मीद है. संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए पार्टियों को कुल राष्ट्रीय वोटों का कम से कम 3.25% हिस्सा हासिल करना जरूरी है. चूंकि नेसेट में 120 सीटें हैं, इसलिए बहुमत की सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों के समर्थन की जरूरी होती है.
नतीजे आने के बाद क्या होगा?
रिजल्ट कंफर्म होने के बाद, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग राजनीतिक प्रतिनिधियों से चर्चा करेंगे और फिर किसी सांसद को अगली सरकार बनाने के लिए न्योता. गठबंधन बनाने की बातचीत में खास तौर से नीतिगत वादों, मंत्री पदों और पार्टियों के बीच समझौतों पर चर्चा होगी. इस प्रक्रिया में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं. अगर तय समय के भीतर बातचीत कामयाब नहीं होती है, तो आगे और राजनीतिक सलाह करने पड़ सकते हैं या फिर दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है.
भारत के लिए ये चुनाव क्यों अहम है?
ये चुनाव भारत के लिए मायने रखता है क्योंकि नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सिक्योरिटी और उन्नत तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग है.
रक्षा सहयोग: भारत इजरायल से सैन्य उपकरण, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और निगरानी तकनीक खरीदता है. नेतन्याहू की वापसी से मौजूदा रक्षा संबंधों के बने रहने में मदद मिल सकती है, हालांकि अंतिम दिशा नई सरकार की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगी.
तकनीकी और आर्थिक रिश्ते: कृषि में नई तरीकों की खोज, जल संरक्षण, अनुसंधान और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में सहयोग, अगली सरकार की नीतियों के आधार पर और बढ़ सकता है.
क्षेत्रीय स्थिरता: भारत के इजरायल के साथ मजबूत रिश्ते हैं, जबकि साथ ही वो फिलिस्तीनी हितों का भी समर्थन करता है. गाजा में चल रहे संघर्ष और ईरान से जुड़े तनावों के कारण, अगली सरकार की क्षेत्रीय नीति बहुत अहम हो जाती है.
भारत करेगा अपने हितों की रक्षा
चाहे नेतन्याहू सत्ता में बने रहें या विपक्ष मजबूत हो, भारत अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करने की कोशिश करेगा. हालांकि गठबंधन सहयोगी इजराइल की डिफेंस प्रायोरिटी और कूटनीतिक नजरिए को प्रभावित कर सकते हैं. भारत के लिए इन चुनावों की अहमियत न सिर्फ नतीजों पर, बल्कि इजराइल की अगली सरकार की तरफ से अपनाई जाने वाली नीतियों पर भी निर्भर करेगा.