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क्या पाकिस्तान के इशारे पर बांग्लादेश ने शेख हसीना को सुनाई सजा-ए-मौत? पूर्व PM के पास अब सिर्फ 2 विकल्प

पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को अच्छे से पता है कि बीत 15 वर्षों से भारत और शेख हसीना सरकार के बीच संबंध गहरे रहे हैं और विद्रोह के बाद हिंदुस्तान ने ही अपदस्थ प्रधानमंत्री को दिल्ली में शरण दी.

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Sheikh Hasina Sentenced to Death: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बीते सोमवार उन्हीं के देश की इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने सजा-ए-मौत की सजा सुनाई. साल 2024 में छात्राओं के विद्रोह के बाद शेख हसीना को अपनी जान बचाने के लिए भारत में शरण लेनी पड़ी. तब से ही वो दिल्ली में किसी गुप्त स्थान पर रह रही हैं. इस बीच शेख हसीना के कई समर्थकों ने बांग्लादेश में हिंसक आंदोलन भी शुरू कर दिये. ICT ने बांग्लादेश में पिछले साल हुए विद्रोह को दबाने के लिए शेख हसीना द्वारा कथित तौर पर गोली चलवाने और मासूमों की जान लेने का दोषी पाया.

शेख हसीना की सजा के पीछे पाकिस्तान की साजिश?


अब शेख हसीना को फांस की सजा सुनाए जाने के मामले में पाकिस्तान का एंगल भी सामने आ रहा है. दरअसल, बांग्लादेश के गृह सचिव नसीमुल गनी एक बार फिर से पाकिस्तान में अपने लंबे दौरे के लिए पहुंचे हैं. वो करीब 10 दिनों से पाकिस्तान में ही है. शेख हसीना विवा के बीच नसीमुल गनी का ये पाकिस्तानी दौरा कई सवाल खड़े कर रहा है. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान के इशारे पर ही शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई गई है, ताकि इससे बांग्लादेश और भारत के बीच कूटनीतिक टकराव का बीज बोया जा सके.

यह भी पढ़ें: क्या है रेड कॉर्नर नोटिस? इंटरनेशनल कार्रवाई का सबसे बड़ा हथियार, शेख हसीना के लिए हो सकता है जारी

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भारत-बांग्लादेश के बीच विवाद चाहता है पाकिस्तान!


पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को अच्छे से पता है कि बीत 15 वर्षों से भारत और शेख हसीना सरकार के बीच संबंध गहरे रहे हैं और विद्रोह के बाद हिंदुस्तान ने ही अपदस्थ प्रधानमंत्री को दिल्ली में शरण दी. ऐसे में इसकी पूरी आशंका है कि पाकिस्तान शेख हसीना के बहाने भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद खड़ा करना चाहता है. शेख हसीना को फांसी की सजा दिए जाने के कुछ देर बाद ही बांग्लादेश ने प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए भारत से शेख हसीना को वापस भेजने का आग्रह किया था.

शेख हसीना के पास अब कौन-कौन से विकल्प?


शेख हसीना के पास फिलहाल 30 दिन का विकल्प है. वो फांसी के फैसले के खिलाफ तब तक अपील नहीं कर सकती जब तक वो सरेंडर या गिरफ्तार नहीं हो जातीं. मौजूदा समय में शेख हसीना के पास इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती देने के लिए 17 दिसंबर, 2025 तक का ही वक्त है. इसके बाद वो अपील करने का अधिकार भी खो देंगी. इसके अलावा उनके पास दूसरा विकल्प ये हैं कि वो भारत में ही बनी रहें और इस बात की उम्मीद करती रहें कि भारत सरकार उन्हें बांग्लादेश के हवाले नहीं करेगी.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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