ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ जिस भीषण युद्ध का आगााज किया, उसकी शुरुआत तेहरान में एक गुप्त बैठक पर मिसाइल हमले से हुई. सीआईए के जासूसों ने पहले ही खामेनेई की सटीक लोकेशन का पता लगा लिया था और जैसे ही वे बैठक के लिए इकट्ठा हुए, इजरायल ने हमला कर दिया. इस हमले में खामेनेई के साथ पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की भी मौत हो गई. ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिकी लोगों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बता रहा है, लेकिन दुनिया भर में इसे एक संप्रभु राष्ट्र के नेता की जानबूझकर की गई हत्या माना जा रहा है.
क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून?
न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण के अनुसार खामेनेई की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत पूरी तरह अवैध मानी जा रही है. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक कोई भी देश किसी दूसरे संप्रभु राष्ट्र पर उसकी सहमति या आत्मरक्षा के पुख्ता सबूत के बिना हमला नहीं कर सकता. चूंकि ईरान ने इस युद्ध की शुरुआत नहीं की थी और न ही उसने अमेरिका या इजरायल पर पहले कोई हमला किया था, इसलिए खामेनेई को निशाना बनाना युद्ध के नियमों का उल्लंघन है. कार्डोजो स्कूल ऑफ लॉ की प्रोफेसर रेबेका इंगबर का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना किया गया यह हमला पूरी तरह गैरकानूनी है. किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को इस तरह मारना इतिहास की सबसे दुर्लभ और विवादित घटनाओं में से एक है.
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युद्ध के नियम क्या हैं?
आमतौर पर युद्ध के दौरान भी किसी देश के राष्ट्रप्रमुख और स्वास्थ्य मंत्री को वैध सैन्य लक्ष्य नहीं माना जाता है, जब तक कि वे सीधे तौर पर लड़ाई में शामिल न हों. हालांकि कानून के कुछ जानकार मानते हैं कि अगर कोई नागरिक नेता अपनी सेना का सर्वोच्च कमांडर है, तो उसे टारगेट किया जा सकता है. लेकिन पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की मौत ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया है, क्योंकि वे किसी भी सैन्य गतिविधि में शामिल नहीं थे. शांति काल में किसी विदेशी सरकारी अधिकारी की हत्या करना अंतरराष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसे में अमेरिका और इजरायल दोनों पर ही युद्ध के नियमों को ताक पर रखकर काम करने के आरोप लग रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस फैसले को सही ठहराने के लिए ‘आसन्न खतरे’ की परिभाषा का सहारा लिया है. उनका दावा है कि ईरानी शासन परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें बनाकर अमेरिका के लिए खतरा पैदा कर रहा था. वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तर्क दिया कि इजरायल ईरान पर हमला करने वाला था और अमेरिका ने रक्षात्मक तरीके से उनका साथ दिया ताकि भविष्य के बड़े हमलों को रोका जा सके. हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून कहते हैं कि अगर कोई देश दूसरे राष्ट्र को कानून तोड़ने में मदद करता है, तो दोनों ही दोषी माने जाते हैं. ट्रंप प्रशासन का यह रवैया दिखाता है कि उन्हें वैश्विक कानूनों से ज्यादा अपनी घरेलू नीति और सुरक्षा हितों की परवाह है.
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