पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमले की योजना बना रहे हैं. वहीं, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ, तो वह ऐसा हथियार दिखाएगा जिसे उसने ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ बताया है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने ईरान के पावर प्लांट और तेल ठिकानों , परमाणु केंद्रों, मिसाइलों और ड्रोन को निशाना बनाने की योजना तैयार की है.
ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली सेनाएं संभावित हमले के लिए सैन्य तैयारी कर रही हैं. अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सप्ताह इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात भी की. इस दौरान ईरान पर दोबारा हमले की होने की खबर है. कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि तीन दिन तक चलने वाला सैन्य अभियान ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. इससे ईरान समझौते के लिए तैयार हो सकता है और कुछ बातें मान सकता है. हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने हमले की पुष्टि नहीं की है. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि प्रशासन उन सैन्य योजनाओं पर बात नहीं करना चाहता , जो हो भी सकती हैं और नहीं भी.
ईरान ने दी ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ की चेतावनी
ईरान ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करता है, तो उसे जवाब दिया जाएगा. ईरान से जुड़े मीडिया संस्थान स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क (SNN) के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता होसैन मोहब्बी ने कहा कि अमेरिका के पास ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ है, जबकि ईरान दुनिया को ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ दिखाएगा. हालांकि, ईरान ने अभी तक यह नहीं बताया है कि यह कौन-सा हथियार है और इसकी क्षमता क्या है.
यह धमकी उन खबरों के बाद आई है, जिनमें कहा गया था कि ट्रंप ईरान के गहरे अंडरग्राउंड परमाणु ठिकाने पर अमेरिका के बड़े बम का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं. इस बम को ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है. विशेषज्ञों ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जमीन के ऊपर विस्फोट करने वाले इस बम से मजबूत चट्टानों के नीचे बने परमाणु ठिकाने को कितना नुकसान होगा, यह स्पष्ट नहीं है.
अमेरिका बढ़ा रहा सैन्य ताकत
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. नवंबर की शुरुआत तक तीन विमानवाहक पोत(Aircraft Carrier), हजारों मरीन सैनिक, लड़ाकू विमान और विशेष सैन्य बल तैनात किए जाने की उम्मीद है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले हमले को टालने पर राजनीतिक विचारों का असर पड़ सकता है. इस वजह से सैन्य कार्रवाई की तारीख को लेकर अंदेशा बना हुआ है.
ईरान बोला- युद्ध जल्दी खत्म नहीं होगा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संसद में कहा कि मौजूदा हालात ईरान, पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के लिए अच्छे नहीं हैं. उन्होंने कहा कि दबाव और युद्ध के बावजूद ईरान पीछे नहीं हटा है और आगे भी अपने रुख पर कायम रहेगा. ईरान के एक वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने भी अमेरिका के इस विचार को खारिज किया कि सैन्य अभियान 72 घंटे में खत्म हो सकता है. उनके मुताबिक, ईरान की जवाबी कार्रवाई पहले से ज्यादा तेज और अलग तरीके की हो सकती है.
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में अटका मामला
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर बातचीत में दबाव बनाने के लिए सैन्य कार्रवाई की संभावना का इस्तेमाल करना चाहता है. लेकिन ईरान परमाणु कार्यक्रम पर तुरंत ढील देने के लिए तैयार नहीं है. पहले हुई अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें और महंगाई बढ़ने की खबरें आई थीं. इससे पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर भी असर पड़ा था. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप ईरान पर नए हमले की मंजूरी देंगे या बातचीत को एक और मौका मिलेगा.