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जंग रोकने के लिए भारत पर क्यों टिका है ईरान का भरोसा? ये हैं 5 बड़े कारण

ईरान-इजरायल जंग के बीच आखिर ईरान को भारत पर इतना भरोसा क्यों है? क्या भारत बनेगा शांति का दूत? जानिए चाबहार से लेकर स्वतंत्र विदेश नीति तक के वे 5 बड़े कारण, जिन्होंने भारत को दुनिया का सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बना दिया है.

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Photo Credit: Gemini AI

ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली ने बीते दिन नई दिल्ली में दिए बयानों में भारत को ईरान-इजरायल जंग के बीच मध्यस्थता के लिए भरोसेमंद खिलाड़ी बताया है, जो मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है. सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका और इजरायल के करीबी होने के बावजूद ईरान को भारत पर इतना भरोसा क्यों है? दरअसल, ईरान का भरोसा भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और सभी पक्षों से बात करने की क्षमता पर टिका है. भारत न तो ईरान का “दोस्त” बन अमेरिका-इजरायल से दुश्मनी लेना चाहता है, न ही ईरान को पूरी तरह अलग-थलग छोड़ना. यही रणनीति दोनों देशों में विश्वास पैदा करती है. जानें ईरान का भरोसा क्यों भारत पर टिका है? मुख्य 5 कारण

दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी स्वतंत्र विदेश नीति है. भारत की आर्थिक ताकत, बाजार का आकार और ग्लोबल साउथ में बढ़ती आवाज उसे एक प्रभावशाली खिलाड़ी बनाती है. ईरान को लगता है कि भारत बड़े पैमाने पर डिप्लोमेसी चला सकता है. भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में आकर अपने फैसले नहीं बदलता. पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने हमेशा ईरान के साथ संवाद के रास्ते खुले रखे हैं.

विदेश नीति नहीं बदलता भारत

भारत की विदेश नीति स्वतंत्र रही है. अमेरिका या इजरायल के साथ मजबूत संबंध होने के बावजूद भारत ईरान के साथ तेल खरीद, चाबहार जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम करता रहा. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने संवाद जारी रखा और कभी पूर्ण रूप से पीछे नहीं हटा. ईरान इसे अपनी सिद्धांत-आधारित नीति मानता है, जो दबाव में झुकती नहीं.

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इजरायल और अमेरिका के साथ मजबूत रिश्ते

यह सबसे बड़ा कारण है. भारत इजरायल से रक्षा, तकनीक और खुफिया सहयोग लेता है, जबकि अमेरिका के साथ क्वाड, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी है. ईरान को लगता है कि भारत इन दोनों पक्षों से ईमानदारी से बात कर सकता है. भारत के रिश्ते जितने ईरान से मजबूत हैं, उतने ही गहरे इजरायल और अमेरिका के साथ भी हैं. यही संतुलित रुख भारत को मध्यस्थ की भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है. भारत अपनी इस डिप्लोमेसी का इस्तेमाल जंग रोकने के लिए कर सकता है.

चाबहार बंदरगाह और आर्थिक हित

भारत ईरान में चाबहार पोर्ट विकसित कर रहा है, जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक रास्ता है. ईरान इसे रणनीतिक महत्व का मानता है. हाल के बयानों में राजदूत फतहाली ने कहा कि ईरान भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार है, भले ही बजट आवंटन में उतार-चढ़ाव हो.अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने 10 साल का अनुबंध किया और बातचीत जारी रखी. ईरान इसे दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक मानता है.

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अमेरिकी बैन के बावजूद संवाद जारी

अमेरिका के प्रतिबंधों के दौर में भी भारत-ईरान के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक बातचीत कभी बंद नहीं हुई, जो यह साबित करता है कि भारत केवल अपने हितों को नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता देता है. ईरान ने भारत को सुरक्षित मार्ग देने का वादा भी किया और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से भारतीय जहाजों को कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि “भारत हमारा दोस्त है”. ईरानी राजदूत ने भारत की निष्पक्षता की तारीफ करते हुए उसे एक स्थिर शक्ति माना है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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