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खामेनेई की मौत का एक सच आया सामने, बंकर में क्यों नहीं छिपे ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर? पढ़ें करीबी का खुलासा

Middle East War: अमेरिका के हमले में 28 फरवरी को अली खामेनेई की मौत हो गई थी, लेकिन लोगों के मन में एक सवाल यह था कि जब उनकी जान को खतरा था तो वे बंकर में क्यों नहीं छिपे? इस सवाल का जवाब मिल गया है। सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने इस सवाल का जवाब दिया है।

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28 फरवरी को अमेरिका के हमले में अली खामेनेई की मौत हुई थी।

Ayatollah Ali Khamanei Death: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की जान को खतरा था। अमेरिका और इजरायल ने उन्हें मारने का ऐलान कर दिया था। इसके बावजूद वे बंकर में क्यों नहीं छिपे? इस सवाल के जवाब में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, इलाही ने बताया कि खामेनेई ने बंकर में छिपने और परिवार को भी छिपाने से साफ इनकार कर दिया था।

ईरान के 9 करोड़ लोगों की परवाह थी

हकीम इलाही ने बताया कि जान को खतरा होने के बावजूद वे न खुद बंकर में छिपे और न ही अपने परिवार को बंकर में छिपाया। उन्हें ईरान छोड़कर कुछ समय के लिए विदेश जाने को भी परिवार ने कहा था, लेकिन उनका कहना था कि जब ईरान के 9 करोड़ लोगों की सिक्योरिटी के लिए शेल्टर नहीं हैं तो वे शेल्टर में कैसे रह सकते हैं? अगर में ईरान के लोगों का सर्वोच्च नेता तो मुझे उनके साथ खड़ा होना चाहिए। उनकी तरह जीना चाहिए और उनकी तरह ही मरना चाहिए।

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घर पर ही रहने का फैसला किया था

अली खामेनेई ने अपने सहयोगियों और परिजनों की बार-बार की गुजारिशों के बावजूद बंकर में या किसी सुरक्षित जगह पर जाने से इनकार कर दिया था। 37 साल तक देश की सेवा करने वाले खामेनेई ने अपने घर पर ही रहने का फैसला किया था। हमले के बीच भी अपने रोजमर्रा के काम करने और दफ्तर जाने का फैसला किया था। वे कहते हैं कि मौत एक दिन हर किसी को आनी है, लेकिन वे अपने 9 करोड़ लोगों को मौत के मुंह में छोड़कर खुद की जान बिल्कुल नहीं बचाएंगे।

घर के अंदर भी बंकर नहीं बनवाया

इलाही के अनुसार, ईरान के खुफिया अधिकारियों ने उनसे अपील की थी कि वे अगर किसी बंकर में या किसी और सुरक्षित स्थान पर नहीं जाना चाहते तो उनके घर में ही तहखाने में बंकर बना देते हैं, लेकिन वे इसके लिए भी नहीं माने। उन्होंने कहा कि पहले 9 करोड़ लोगों के लिए बंकर बना दो, फिर मेरे लिए बंकर बना देना। यही सवाल जब उनके परिवार से पूछा गया तो यही जवाब मिला कि जब देश के लोग सुरक्षित होंगे, तब वे अपनी सुरक्षा के बारे में सोचेंगे, वरना कोई हक नहीं है।

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28 फरवरी को हमले में मारे गए थे

बता दें कि ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमले में मारे गए थे। अमेरिका ने उनके दफ्तर पर बमबारी की थी, जिसमें उनके साथ कई अधिकारी और सहयोगियों ने भी जान गंवाई थी। उनके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि मोजतबा भी हमले में बुरी तरह घायल हुए थे, लेकिन अब ईरान ने दावा किया है कि मोजतबा बिल्कुल स्वस्थ हैं और उन्हें कोई चोट न लगी।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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