US vs Iran Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. समुद्र में ईरान को घेरने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को न्यूक्लियर डील के लिए टेबल पर आने को कहा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान ने न्यूक्लियर डील नहीं की तो इस बार होने वाला हमला पहले से ज्यादा खतरनाक होगा. वहीं राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी का ईरान ने भी करारा और दोटूक जवाब दिया है.
ईरान ने अमेरिका को दिया है कड़ा जवाब
ईरान की ओर से कहा गया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका सम्मान दे और भलाई की भावना से आए. अगर डील के लिए जबरदस्ती हुई या दबाव डाला गया तो ईरान अपनी रक्षा करने से पीछे नहीं हटेगा और फिर अमेरिका को ऐसा जवाब मिलेगा, जैसा आज तक किसी को नहीं मिला होगा? अमेरिका ने ईरान का घेराव किया है, लेकिन हमला सोच-समझ करे तो बेहतर होगा.
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बातचीत से समाधान निकालने के संकेत
बता दें कि अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच बातचीत से समाधान निकालने के संकेत मिले हैं. मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत की 'मेज पर आएगा और सभी पक्षों के हित में एक निष्पक्ष और समान सौदा करेगा, लेकिन नो न्यूक्लियर वेपन अमेरिका की शर्त होगी. इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हमारी सेना ट्रिगर पर उंगली रखे हुए है, लेकिन ईरान परमाणु समझौते के लिए तैयार है और हमेशा से था, वहीं अराघची ने भी लिखा है- नो न्यूक्लियर वेपन.
अमेरिका ने ईरान के सामने रखी 3 शर्तें
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यूरोपी के कुछ देशों की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है. संभावित सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए अमेरिका ने ईरान के सामने 3 शर्तें रखी हैं. पहली शर्त ईरान में सभी स्थानों पर यूरेनियम संवर्धन का स्थायी अंत करना होगा. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के द्वारा तय की गई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज और संख्या पर अंकुश लगाया जाए. मध्य पूर्व में ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स का अंत किया जाए, जिसमें हमास, हूती और हिजबुल्लाह शामिल हैं. हालांकि ईरान अभी इन शर्ताें के लिए तैयार नहीं है, लेकिन बातचीत चल रही है.
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चीन ने अमेरिका को दी है खास नसीहत
ईरान को दी जा रही राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के बीच चीन ने अमेरिको सलाह दी है कि बल प्रयोग समस्याओं का समाधान नहीं है. अगर मध्य पूर्व में कोई भी सैन्य दुस्साहस किया गया तो यह पूरे इलाके को अनिश्चितता की गहरी खाई में धकेल देगा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बुधवार को हुई बैठक में चीन के राजदूत फूकॉन्ग ने अमेरिका को UN चार्टर का पालन करने की सलाह दी. कूटनीतिक रूप से ईरान का पक्ष लेते हुए चीन ने भले ही खुद को शांतिदूत के तौर पर पेश किया, लेकिन रूस के बाद चीन दूसरा UNSC सदस्य देश है, जो खुलकर ईरान के साथ खड़ा दिख रहा है.