अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान ने पीछे हटने की तमाम अपीलों को खारिज करते हुए अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है. ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया है. इस भीषण हमले में बड़े पैमाने पर तबाही की खबर है और बताया जा रहा है कि यहीं पर कई अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं. ईरान की ओर से किए गए इस अचानक हमले ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है. तेहरान की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि वे किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे और अपने नेताओं की मौत का बदला इसी तरह के हमलों से लेते रहेंगे.
बहरीन और अमेरिकी युद्धपोतों पर बड़ा हमला
ईरान की ओर से केवल जमीन पर ही नहीं बल्कि समंदर में भी जोरदार हमले किए जा रहे हैं. बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर लगातार ड्रोन हमले किए गए हैं, जिससे वहां मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर को गंभीर क्षति पहुंची है. सबसे चौंकाने वाली खबर अमेरिकी विमानवाहक पोत 'अब्राहम लिंकन' को लेकर आई है. ईरानी सेना का दावा है कि उन्होंने इस विशाल युद्धपोत पर चार मिसाइलों से सटीक निशाना साधा है. हमले के बाद अब्राहम लिंकन को अपनी पोजीशन छोड़कर पीछे हटना पड़ा है और वह खुद को बचाने के लिए अब एक सेफ जोन में पहुंच चुका है. ईरान ने अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों का इस्तेमाल कर अमेरिका की नौसैनिक बढ़त को कड़ी चुनौती दी है.
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सैनिकों की मौत के आंकड़ों पर छिड़ा विवाद
इस युद्ध में हताहत होने वाले सैनिकों की संख्या को लेकर अमेरिका और ईरान के दावों में बड़ा अंतर देखा जा रहा है. ईरान की फौज ने दावा किया है कि उनके हमलों में अब तक 560 अमेरिकी सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं. हालांकि, शुरुआती तौर पर अमेरिका ने केवल 3 सैनिकों की मौत और 5 के घायल होने की पुष्टि की थी. लेकिन स्थिति तब और गंभीर हो गई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बारे में पूछे जाने पर स्वीकार किया कि मरने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ सकती है. ट्रंप के इस बयान ने अमेरिकी जनता और रक्षा विशेषज्ञों के बीच हड़कंप मचा दिया है. यह साफ हो गया है कि जमीनी हकीकत शुरुआती दावों से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकती है.
'ईरान की शर्तों पर होगा युद्ध का अंत'
ईरान के इस आक्रामक रुख ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है. ईरान की सत्ता ने स्पष्ट कर दिया है कि वे न तो युद्ध रोकेंगे और न ही किसी समझौते के लिए आगे आएंगे. आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने युद्ध की शुरुआत की है और अब इसका अंत ईरान की शर्तों पर ही होगा. पूरे मध्य पूर्व में तनाव अपनी चरम सीमा पर है और आने वाले दिनों में और भी बड़े मिसाइल हमलों की आशंका जताई जा रही है. अमेरिका अब अपने अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर जवाबी रणनीति तैयार कर रहा है. दुनिया के सामने अब तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा है क्योंकि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है.