ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने रविवार को खुलेआम चुनौती देते हुए कहा, अमेरिकी नाकेबंदी के जारी रहते वह झुकने वाला नहीं है. ईरानी समाचार एजेंसी 'तसनीम' के मुताबिक, तेहरान ने अभी तक इस्लामाबाद वार्ता के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है. उनका तर्क है कि बंदूक की नोक पर बातचीत संभव नहीं है. इससे पहले ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने जा रही है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर सख्त लहजे में कहा कि यह बातचीत ईरान के लिए आखिरी मौका हो सकती है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी, "अगर ईरान ने हमारी उचित डील नहीं मानी, तो अमेरिका उसके हर पावर प्लांट और हर पुल को ज़मींदोज़ कर देगा."

वेंस नहीं, ये दिग्गज संभालेंगे कमान

ताजा अपडेट के अनुसार, इस महत्वपूर्ण वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल नहीं होंगे. उनकी जगह ट्रंप के भरोसेमंद विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर सोमवार शाम तक इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. ये दोनों प्रतिनिधि मंगलवार को ईरानी अधिकारियों के साथ मेज पर बैठेंगे. इससे पहले हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, जिसके बाद ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है.

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क्यों बिगड़े हालात?

शुक्रवार को लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच 10 दिनों के युद्धविराम के बाद ईरान ने होर्मुज को खोलने का संकेत दिया था, लेकिन जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, ईरान ने तुरंत अपने प्रतिबंध दोबारा लागू कर दिए. ईरान का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका आर्थिक घेराबंदी नहीं हटाता, वह किसी भी जहाज को वहां से सुरक्षित निकलने नहीं देगा.
ईरानी संसद के स्पीकर और पहले दौर की वार्ता के प्रतिनिधि मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "हम कूटनीति के मोर्चे पर पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन जब हमारे रास्ते बंद हैं, तो हम दूसरों को भी नहीं गुजरने देंगे."

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