Indian Citizen Arrested In US: अमेरिकी नागरिक न होने के बावजूद 2024 के यूएस जनरल इलेक्शन में कथित तौर पर वोट डालने के आरोप में, अमेरिकी इमिग्रेशन अथॉरिटीज ने एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है. मुकेशकुमार सोमाभाई चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने और वोट डालने के लिए खुद को अमेरिकी नागरिक बताया, जो कि झूठ था. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के मुताबिक, उन पर 2 आपराधिक आरोप हैं. अगर दोषी पाए जाते हैं, तो इनमें से हर आरोप के लिए उन्हें अधिकतम 5 साल की जेल हो सकती है.
मुकेश ने वोट कैसे डाला?
फेडरल अथॉरिटीज ने बताया कि 5 नवंबर 2024 को, यानी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दिन, मुकेशकुमार सोमाभाई चौधरी ने मिनेसोटा में एक ‘वोटर सिग्नेचर सर्टिफिकेट’ पर दस्तखत किए. इस दस्तावेज पर साइन करने का मतलब था कि उन्हें ये कंफर्म करना था कि वो अमेरिकी नागरिक हैं. 10 सितंबर को एक फेडरल ग्रैंड जूरी ने उनके खिलाफ आरोप पत्र जारी किया, जिससे उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ सकी. हालांकि, अभी तक अदालत में ये आरोप साबित नहीं हुए हैं.
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इलेक्शन फ्रॉड के खिलाफ सख्ती
ये मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन फेडरल इलेक्शन में गैर-नागरिकों द्वारा कथित तौर पर वोट डालने की घटनाओं को रोकने के लिए अपने प्रयासों को तेज कर रहा है. ट्रंप ने ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ (DHS), स्टेट वोटर्स रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और सार्वजनिक दस्तावेजों की एक समीक्षा का हवाला देते हुए दावा किया है कि इसमें तकरीबन 278000 ऐसे गैर-नागरिकों की पहचान हुई है, जो संघीय चुनावों में वोट डालने के लिए रजिस्टर्ड थे.
प्रशासन ने कांग्रेस से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की भी गुजारिश की है. अगर ये कानून लागू होता है, तो फेडरल इलेक्शन में वोट डालने के लिए नागरिकता का सबूत और फोटो पहचान पत्र देना अनिवार्य हो जाएगा. हालांकि इस प्रस्ताव का विरोध भी हो रहा है. आलोचकों को चिंता है कि कड़े नियम लागू होने से पात्र अमेरिकी नागरिक, खासकर अल्पसंख्यक वोटर्स अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से महरूम रह सकते हैं.
गंभीर कानूनी परिणामों को लेकर दी चेतावनी
DHS सचिव मार्कवेन मुलिन ने चेतावनी दी है कि जो गैर-नागरिक अवैध रूप से वोट डालते पाए जाएंगे, उन्हें गिरफ्तारी, आपराधिक मुकदमे और अपने देश वापस भेजे जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। DOJ के ‘सिविल राइट्स डिवीजन’ की चीफ, असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने कहा कि जो लोग वोट डालने के लिए जानबूझकर अपनी नागरिकता के बारे में झूठा दावा करेंगे, उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि चुनाव की इंटीग्रिटी बरकरार रखने के लिए ये एनश्योर करना जरूरी है कि फेडरल इलेक्शन में सिर्फ एलिजिबल सिटीजन ही हिस्सा लें.
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