भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक डील हुई है। इस डील के बाद अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत से घटाकर कुल 18 प्रतिशत टैरिफ कर दिया है। साथ ही भारत और अमेरिका ने डील में कई उत्पादों पर जीरो टैरिफ किया है। इससे ये माना जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध काफी हद तक बेहतर हो गए हैं। लेकिन एक फैसला अमेरिका को झटका दे सकता है। आगामी गाजा पीस बैठक में भारत ने शामिल नहीं का फैसला किया है। इसे अमेरिका के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
बता दें कि इजरायल और फिलिस्तीन युद्ध को रुकवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कई प्रयास किए। फिलिस्तीन के गाजा में शांति को लेकर ट्रंप ने पीस प्लान तैयार किया था। इस पर फिलिस्तीन और इजरायल दोनों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी थी। ट्रंप ने पीस प्लान की बैठक के लिए बोर्ड बनाया था। इसमें कई देश शामिल हुए थे।
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हालांकि भारत से पहले से ही इस बोर्ड से दूरी बनाई थी क्योंकि इसमें पाकिस्तान और तुर्की भी शामिल हुए थे। 19 फरवरी को गाजा पीस बोर्ड की पहली बैठक होने वाली है। अमेरिका के साथ ऐतिहासिक डील होने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि भारत गाजा पीस बोर्ड की बैठक में शामिल हो सकता है लेकिन सूत्रों के मुताबिक भारत अभी भी अपने पुराने रुख पर बरकरार है।
बोर्ड ऑफ पीस की यह पहली बैठक होने वाली है। इसमें कई देशों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, भारत सरकार अभी तक ट्रंप के प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है। भारत पहली बैठक में शामिल नहीं होना चाह रहा। पहली बैठक के हिसाब से भारत निर्णय लेने की सोच रहा है। हाल में ही अरब लीग के देशों के विदेश मंत्रियों के साथ भारत ने बैठक की थी। इस दौरान भी ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को लेकर बात हुई। गाजा पीस बोर्ड में कई अरब देश शामिल हैं। लेकिन अभी तक इन देशों ने बैठक में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है।
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