भारत ने यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में सुधारों की मांग फिर से की है और नसीहत दी है कि UNSC के 5 स्थायी सदस्यों को अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कंट्रोल में करना चाहिए. क्योंकि यह एक खास अधिकार और बड़ी जिम्मेदारी. इस पावर को छोटी राजनीतिक सुविधा की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के जुड़े मुद्दों को लेकर इस पावर का इस्तेमाल बहुत सावधानी से होना चाहिए. न्यूयॉर्क में UNSC की सभा में भारत की ओर से बयान देते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि सिक्योरिटी काउंसिल रिफॉर्म्स पर टेक्स्ट-बेस्ड बातचीत जल्द से जल्द शुरू होने चाहिए, जिसकी एक टाइमलाइन और माइलस्टोन हों.
वीटो पावर का इस्तेमाल सिर्फ 3 सदस्य करते
UNSC में पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि वीटो पावर के इस्तेमाल का रिकॉर्ड बहुत खराब है. आज तक 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल किया गया है. पांचों स्थायी सदस्यों में से 2 ने 35 साल से ज्यादा समय से वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है, जबकि ज्यादातर मामलों में वीटो या वीटो की धमकी सिर्फ 3 स्थायी सदस्य देशों ने दी है. हमारी मांग सिंपल है कि सुधार करने के लिए डेमोक्रेटिक और टाइम टेस्टेड तरीका, टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशन, जल्द से जल्द, बेहद क्लियर टाइमलाइन और माइलस्टोन के साथ शुरू करें. भारत इस कोशिश में को-चेयर करेगी और सभी देशों के डेलीगेशन के साथ कंस्ट्रक्टिव तरीके से जुड़ेगा. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए वीटा पावर इस्तेमाल में सुधार की जरूरत है.
सुधारों के लिए कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच की मांग
पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि सिक्योरिटी काउंसिल की क्रेडिबिलिटी, लेजिटिमेसी और इफेक्टिवनेस पर सवाल उठ रहे हैं और इन सवालों का जवाब सिर्फ वीटो पावर को मैनेज करके नहीं दिया जाएगा. बल्कि भारत सवालों का जवाब देने में काउंसिल की मदद करने के लिए तैयार है. भारत सिक्योरिटी काउंसिल में सुधारों के लिए कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच की मांग को दोहराता है. क्योंकि किसी एक के वीटो लगा दिए जाने से प्रेसिडेंशियल स्टेटमेंट, प्रेस स्टेटमेंट, सैंक्शन कमेटियों के फैसलों पर सवाल उठ जाते हैं. UNSC में पेश किए गए किसी प्रपोजल को रोकने या ब्लॉक करने का रास्ता ही वीटो पावर होता है. लेकिन किसी एक की आपत्ति से यह साबित नहीं होता कि प्रस्ताव या फैसले पर सभी सदस्यों को आपत्ति है.
पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि भारत की मांग फेयरनेस और जस्टिस है. भारत चाहता है कि वीटो पावर का इस्तेमाल पांचों स्थायी सदस्य देशों के द्वारा किया जाना चाहिए, न कि 2 या 3 देश करें. इससे न तो स्थायी सदस्यों को इंसाफ मिल रहा है और न ही अन्य सदस्यों के साथ इंसाफ हो रहा है. सभी परमानेंट मेंबर्स को एक जैसे अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए. अगर भेदभाव गहराता गया तो परिषद के अस्तित्व पर सवाल उठ सकते हैं, जो दुनिया के लिए खतरा होगा.