नेपाल को बाढ़ से कितना हुआ नुकसान, पुनर्निमाण में कितना पैसा होगा खर्च? पढ़ें रेड क्रॉस की जुबानी विनाश की कहानी

नेपाल में अचानक आई प्राकृतिक आपदा से देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है. 8 जिलों का नामोनिशां मिट गया है और बालेन शाह सरकार की सबसे बड़ी चुनौती इन जिलों को फिर से बसाने की है. बाढ़ से नेपाल का कितना नुकसान हुआ और पुनर्वास-पुनर्निमाण के लिए क्या चाहिए? आइए जानते हैं…

Flash Floods | Nepal PM | Balen Shah

नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा से देश का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. (Credit- ANI)

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नेपाल में 26 अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा ने तबाही का खौफनाक मंजर दिखाया. ग्लेशियर टूटकर गिरने के बाद ग्लेशियल झील फटने से आई भयानक बाढ़ ने नेपाल के 8 जिले तबाह कर दिए. पिछले साल Gen-Z विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता में आई बालेन शाह सरकार पहले से ही चुनौतियों के साथ देश के विकास के लिए प्रयासरत थे, लेकिन अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे उबर पाना असंभव लग रहा है. क्योंकि बालेन शाह सरकार को पूरे देश क विकास को दरकिनार करके बाढ़ से तबाह हुए 8 जिलों को फिर से बसाने का टारगेट पूरा करना होगा.

कितना नुकसान हुआ और कितने पैसे की जरूरत?

हालांकि बालेन शाह सरकार ने नुकसान के आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा से नेपाल को करीब 200 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है. नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने भी हजारों करोड़ का आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई. उन्होंने कहा कि 8 जिलों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास का खर्च साल 2015 में आए भूकंप के बाद हुए 9 अरब डॉलर से कम होगा, यानी नेपाल को 4-5 अरब अमेरिकी डॉलर यानी 33000 करोड़ से 41500 करोड़ रुपये की जरूरत है. भूकंप में 9000 लोग मारे गए थे और 5 लाख से ज्यादा तबाह हुए थे. लेकिन बाढ़ से अब तक 700 लोगों की मौत और 100000 घरों के तबाह होने की रिपोर्ट है.

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हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और पर्यटन का कारोबार ठप

बता दें कि बाढ़ ने पुलों और सड़कों को बहा दिया और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचाया है. राष्ट्रीय बिजली उत्पादन में 12 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी वाले बिजली प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा. इन प्रोजेक्ट्स के तहत काम करने वाले 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता हैं. पर्यटन कारोबार, तीर्थ यात्रा पर्यटन, ट्रैकिंग और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियां ठप हैं. वर्ल्ड बैंक के अनुसार, नेपाल की GDP में टूरिज्म का 6.4 फीसदी योगदान है और देश के 15 प्रतिशत लोग इसी सेक्टर में नौकरियां करते हैं. लेकिन बाढ़ ने देश के इसी सेक्टर को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. आलम यह है कि प्राकृतिक आपदों की आशंका से अब पूरी दुनिया के लोग नेपाल आने से हिचकिचाने लगेंगे, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है.

स्कूल तबाह तो पढ़ाई और सड़कें तबाह तो ट्रेड ठप

रेड क्रॉस सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में अचानक आई फ्लैश फ्लड से करीब एक लाख लोग प्रभावित हुए हैं. वहीं 10000 स्कूली बच्चों का नुकसान किया है, क्योंकि 18 स्कूल बह गए हैं और 20 स्कूलों की इमारतें गिर गई हैं. नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले पासांग ल्हामु हाईवे का 40 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा ध्वस्त हाे गया है, जिस वजह से उत्तरी रसुवा जिला देश के बाकी हिस्सों से कट गया है. ग्यिरोंग पोर्ट से होकर चीन जाने वाला इंटरेनशनल ट्रेड रूट बंद है. जिससे कारोबार पर असर पड़ा है. नेपाल-भारत सीमा पर महाराजगंज में सोनोली बॉर्डर पर 16 किमी लंबी मालवाहक वाहनों की कतारें लगी हैं. भारत-नेपाल 75 से 92 हजार करोड़ का कारोबार करते हैं. लेकिन इस साल दोनों देशों का भारी आर्थिक नुकसान होगा.

18 पहाड़ी गांवों का संपर्क बाकी देश से पूरी तरह कटा

रासुवा में अचानक प्राकृतिक आपदा आने के बाद 18 से ज्यादा पहाड़ी गांव बाकी देश से कट गए हैं. तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, थुमन तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता अब हेलिकॉप्टर या पैदल है. सेना हेलिकॉप्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे हुए लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने में जुटी है. बाढ़ में नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाला रासुवागढ़ी फ्रेंडशिप ब्रिज बह गया है, जिसे जोड़ने का प्रयास जारी है. भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों पर बने सस्पेंशन ब्रिज अस्थायी तौर पर जोड़े जा रहे हैं, ताकि लोगों की आवाजाही शुरू हो. नेपाल के शीर्ष अधिकारी नरेंद्र परियार और विदेश मंत्री शिशिर खनाल हालातों पर नजर रखे हुए हैं. नेपाल को अब खोज और बचाव अभियानों में मदद की जरूरत नहीं है, बल्कि अब सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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