ना मिसाइल, ना ड्रोन… हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ निकाला नया 'हथियार'; एपस्टीन फाइल्स के जरिए कर रहे बदनाम

पिछले महीने सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का की दिशा में ड्रोन और मिसाइलें दागने का आरोप लगाया था, जिसे हूती विद्रोही सिरे से खारिज कर चुके हैं. अब इस धार्मिक आरोप की काट के लिए हूतियों ने एपस्टीन के मुद्दे को ढाल बना लिया है.

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हूति विद्रोही लगातार सऊदी अरब को निशाना बना रहे हैं. (Image - AI)

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपनी जंग में एक अनोखा हथियार निकाला है. यह कोई नई बैलिस्टिक मिसाइल या हमलावर ड्रोन नहीं, बल्कि अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन का नाम है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूती विद्रोही सऊदी अरब को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने और मुस्लिम जगत में उसकी साख गिराने के लिए हाल ही में पब्लिक हुई अमेरिकी न्याय विभाग की एपस्टीन फाइलों का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

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हूतियों का यह पूरा डिजिटल कैंपेन अमेरिकी दस्तावेजों के उस हिस्से पर टिका है, जिसमें दावा किया गया था कि सऊदी शाही परिवार से जुड़े लोगों ने जेफरी एपस्टीन को काबा के गिलाफ का कपड़ा भेजा था.

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पिछले महीने सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का की दिशा में ड्रोन और मिसाइलें दागने का आरोप लगाया था, जिसे हूती विद्रोही सिरे से खारिज कर चुके हैं. अब इस धार्मिक आरोप की काट के लिए हूतियों ने एपस्टीन के मुद्दे को ढाल बना लिया है.

हूती राष्ट्रपति मेहदी अल-मशात ने सऊदी पर पलटवार करते हुए कहा, ‘जिन्होंने यौन अपराधी एपस्टीन को काबा का गिलाफ भेंट किया, वे असल में मक्का को निशाना बनाने वाले लोग हैं.’ हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने के बाद से सऊदी अरब के अधिकारियों ने इन दावों या आरोपों पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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चारों तरफ से घेराबंदी

इस नैरेटिव को फैलाने के लिए हूती विद्रोही केवल आधिकारिक बयानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने डिजिटल मीडिया के सभी माध्यमों को झोंक दिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 27 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले यमनी कॉमेडियन मुस्तफा अल-मोमरी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आलोचना करते हुए वीडियो बनाए हैं.

वहीं, यमन के स्थानीय संगीतकारों ने इस दावे पर बाकायदा गाने तैयार किए हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाया जा रहा है. हूती प्रमुख अब्दुल-मलिक अल-हूती ने अपने भाषणों में इस बात को बार-बार उठाया है. हूतियों की यह रणनीति केवल अरब दुनिया तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका असर पश्चिमी सोशल मीडिया और पॉडकास्टर्स पर भी दिखने लगा है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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