यमन के हूती विद्रोही अब सिर्फ बंदूक लेकर पिकअप गाड़ियों में घूमने वाले लड़ाके नहीं रह गए हैं. ईरान की हथियार तकनीक, चीन में बने मिसाइल के पुर्जों और Anthropic के Claude AI की मदद से वे अपने ड्रोन और मिसाइलों को ज्यादा आधुनिक बनाने में जुटे हैं. इससे सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए चुनौती बढ़ रही है. उन्होंने यमन के कई इलाकों में अपनी पकड़ बना रखी है और सऊदी अरब के हवाई हमलों के बावजूद अपनी ताकत कायम रखी है. वे सऊदी अरब के तेल ठिकानों, रिफाइनरियों और राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बना चुके हैं. सवाल यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर देश यमन में सक्रिय ये विद्रोही आधुनिक हथियार कैसे तैयार कर रहे हैं और सऊदी अरब जैसे ताकतवर देश के लिए खतरा कैसे बन गए हैं?
हूतियों के हथियारों का जखीरा
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी की फरवरी 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों के पास बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और बिना पायलट वाले ड्रोन का बड़ा जखीरा है. इनमें से कई हथियारों की तकनीक ईरानी हथियारों से मिलती-जुलती है. उनके ड्रोन में समाद और वईद सीरीज शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, समाद ड्रोन की मारक दूरी करीब 1,800 किलोमीटर, वईद-1 की 900 किलोमीटर और वईद-2 की 2,500 किलोमीटर तक बताई गई है. ये ड्रोन विस्फोटक लेकर लंबी दूरी तक जा सकते हैं और टारगेट पर हमला करने के बाद नष्ट हो जाते हैं.
मिसाइलों में बुर्कान-3 शामिल है, जिसकी मारक दूरी करीब 1,200 किलोमीटर बताई गई है. हूतियों का दावा है कि कुद्स-4 क्रूज मिसाइल 2,000 किलोमीटर तक हमला कर सकती है. उनके पास आसिफ एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल भी है, जिसकी बताई गई दूरी करीब 400 किलोमीटर है. यह समुद्री जहाजों और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन सकती है. हूतियों ने तूफान और हातिम जैसे दूसरे हथियार भी दिखाए हैं.
ईरान दे रहा हथियार बनाने की तकनीक?
हूतियों की बढ़ती सैन्य ताकत में ईरान की मदद अहम मानी जाती है. अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने उन्हें मिसाइलें, ड्रोन और दूसरे हथियारों से जुड़े सामान दिए हैं. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की एक रिपोर्ट कहती है कि यमन की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज ने भारी मात्रा में हथियार पकड़े थे, जिसमें करीब 750 टन आम हथियार और अन्य सैन्य सामान शामिल था. इसमें ड्रोन के आधुनिक पुर्जे, मिसाइल के वारहेड और रडार सिस्टम भी थे. हथियारों के पुर्जे लकड़ी की छोटी नावों के जरिए यमन पहुंचाए जाते रहे हैं. हूती इन पुर्जों को जोड़कर हथियार तैयार करते हैं और उन पर अपने नाम या पहचान के निशान लगा देते हैं.
अप्रैल 2025 में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की रिपोर्ट में कहा गया कि ईरानी एक्सपर्ट्स, मशीनों और पुर्जों की मदद से हूतियों ने यमन में कुछ ड्रोन और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को जोड़ने और बनाने की क्षमता तैयार कर ली है. हालांकि, वे पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हैं. मिसाइलों की दिशा तय करने वाले सिस्टम, इंजन और रडार से जुड़े खास पुर्जों के लिए उन्हें अब भी बाहरी मदद चाहिए. वे बाजार में मिलने वाले विदेशी पुर्जों के साथ ईरानी तकनीक का भी इस्तेमाल करते हैं.
चीन से आ रहे हैं मिसाइल बनाने के पुर्जे
ईरान के अलावा चीन से जुड़े सप्लायरों के पुर्जे भी हूतियों के हथियार बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में यमन के अधिकारियों ने हथियारों के दो ऐसे स्टॉक पकड़े थे, जिनमें चीन के सप्लायरों से जुड़े पुर्जे मिले थे. बताया गया कि इनका इस्तेमाल ईरान की खैबर शिकन बैलिस्टिक मिसाइल जैसा हथियार बनाने में किया जा सकता था. इन पुर्जों में मिसाइल के ढांचे और रॉकेट मोटर के लिए खास तरह से तैयार धातु के हिस्से, मिसाइल को स्थिर रखने वाले पंख, गर्मी सहने वाली सामग्री और जांच के उपकरण शामिल थे.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की मिसाइल करीब 1,200 मील दूर तक के ठिकानों को निशाना बना सकती है. सितंबर में ब्लूमबर्ग की एक जांच में भी चीन से भेजे गए एक कंटेनर में मशीनें, रसायन और अन्य पुर्जे मिलने की बात सामने आई थी. यह खेप जुलाई में पकड़ी गई थी और हूतियों के नियंत्रण वाले होदेइदा बंदरगाह जा रही थी. इसमें मिला एक संदिग्ध पिछला मिसाइल पंख ईरान की खैबर शिकन मिसाइल का हिस्सा हो सकता था.
AI से बना रहे हथियार
हूतियों की हथियार बनाने की कोशिशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है. AI कंपनी Anthropic ने सितंबर में बताया कि उत्तरी यमन में मौजूद एक समूह ने उसके Claude Code टूल का इस्तेमाल हथियार बनाने से जुड़े तीन कार्यक्रमों में किया. कंपनी के मुताबिक, इस टूल की मदद से हथियारों को दिशा देने, रास्ता तय करने और उड़ान नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर पर काम किया गया. इन प्रोजेक्ट्स में एक गाइडेड रॉकेट, करीब 2,000 किलोमीटर की बताई गई मारक दूरी वाली कई चरणों की बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल शामिल थे. Anthropic के मुताबिक, समूह ने Claude की मदद से तैयार किए गए रॉकेट का परीक्षण करने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा. कंपनी को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि इन कोशिशों से बना कोई हथियार सफलतापूर्वक इस्तेमाल के लिए तैयार हो गया था.