मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बाद सऊदी अरब और हूती विद्रोही जंग के मैदान में हैं. इस जंग को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जो सऊदी अरब के साथ-साथ इजरायल के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही चीन की मदद से ईरान की खेइबर शेकान जैसी बैलिस्टिक मिसाइल बना रहे हैं, जिसका निशाना सऊदी अरब के साथ-साथ इजरायल हो सकता है. चीन ने इस मिसाइल को बनाने के लिए हूती विद्रोहियों को कलपुर्जे दिए हैं. ऐसे में अगर हूती विद्रोही मिसाइल बनाने में कामयाब हो गए तो मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ सकता है और अमेरिका एक और युद्ध का हिस्सा बन सकता है, क्योंकि वह सऊदी-इजरायल दोनों का दोस्त हैं.
चीन के पुर्जों से ही ईरान ने ‘खेबर शेकन’ बनाई
कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) नामक संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, युद्धग्रस्त इलाकों में हथियारों और उनकी सप्लाई चेन पर नजर रखना उनका काम है. ऐसे ही एक जांच करते हुए पता चला है कि हूती विद्रोहियों ने चीनी सप्लायर से कलपुर्जे लिए हैं, जो मिसाइल बनाने में काम आते हैं. इन्हीं पुर्जों से ईरान ने ताकतवर मिसाइल ‘खेबर शेकन’ बनाई है. खेबर शेकन मध्यम दूरी की मिसाइल है. इस मिसाइल को बनाने के लिए ही चीन से मंगवाए गए पुर्जों की 2 खेप यमन पुलिस ने जब्त की थी. इस खेप में मिसाइल के मोटर वाले हिस्से, फ्रेम के टुकड़े, पंख और गर्मी से बचाने वाले शील्ड थे. डॉक्यूमेंट चेक करने पर इन पुर्जे के चीन से आने का पता चला और इन्हें बनाने वाली कंपनी हवाई जहाजों के पुर्जे बनाती है.
कितनी ताकतवार है ‘खेबर शेकन’ मिसाइल?
बता दें कि चीन के पुर्जों से बनी ईरान की ‘खेबर शेकन’ मिसाइल बेहद खतरनाक और ताकतवर हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो करीब 1900 किलोमीटर दूर तक हमला कर सकती है. सऊदी अरब और इजरायल इस मिसाइल की जद में आ जाएंगे. मिसाइल लॉन्च होने के बाद इसका वॉरहेड यानी विस्फोटक अलग होकर तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ता है और इसकी स्पीड 9656 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है. इस स्पीड के कारण ही यह हाइपरसोनिक मिसाइल है. एयर डिफेंस सिस्टम से बचने के लिए यह मिसाइल खुद अपनी दिशा बदलने में भी सक्षम है. दूसरे शब्दों में कहें तो यह मिसाइल सटीक निशाना लगा सकती है और इससे बचाव करना दुश्मन के लिए मुश्किल होगा.
हूती विद्रोहियों के कारण कैसे बढ़ेगा संघर्ष?
बता दें कि हूती विद्रोहियों ने पहले लाल सागर में सऊदी अरब के ठिकानों पर हमला किया और तेल-गैस सप्लाई को बाधित किया. अब अगर वे खुद बैलिस्टिक मिसाइल बना लेते हैं तो ईरान पर उनकी डिपेंडेंसी कम हो जाएगी और वे ज्यादा ताकतवार हो जाएंगे, जिसके बल पर वे मिडिल ईस्ट के कई देशों के लिए खतरा बन सकते हैं. इजरायल के लिए भी खतरा बन सकते हैं और अगर हूतियों ने इजरायल पर हमला किया तो अमेरिका को उसका साथ देना पड़ेगा. वहीं हूतियों के हमले से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से कीमतें और समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हो सकता है, जिससे रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जैसे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की सप्लाई बाधित होगी और कीमतें भी बढ़ जाएंगी.