मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब समंदर के भीतर तक पहुंच गई है. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरनाक समुद्री माइंस बिछाना शुरू कर दिया है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ दिनों में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दर्जनों माइंस पानी में उतार दी हैं जिससे यह इलाका अब ‘डेथ वैली’ के नाम से पुकारा जाने लगा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास अभी भी अपनी छोटी नावों और माइन बिछाने वाले जहाजों का बड़ा हिस्सा सुरक्षित है जिससे वह इस पूरे जलमार्ग को पूरी तरह ब्लॉक करने की ताकत रखता है. इस बारूदी जाल की वजह से दुनिया भर के तेल टैंकरों का रास्ता रुक गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार मचा हुआ है.
ट्रंप की तबाही वाली चेतावनी
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की इस हरकत पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर इन माइंस को तुरंत नही हटाया गया तो ईरान को ऐसे सैन्य परिणाम भुगतने पड़ेंगे जो उसने पहले कभी नही देखे होंगे. ट्रंप ने दावा किया है कि अमरीका के पास दुनिया के सबसे बेहतरीन उपकरण हैं जो समुद्र के भीतर छिपी माइंस का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए अमरीकी नौसेना के जहाज वहां मुस्तैद हैं. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नही आता है तो अमरीका सीधे तौर पर माइन बिछाने वाले जहाजों को निशाना बनाएगा.
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तेल सप्लाई पर बड़ा संकट
होर्मुज के इस रास्ते के बंद होने से करीब डेढ़ करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की सप्लाई अटक गई है जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है. इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए यह रास्ता जीवन रेखा की तरह है क्योंकि उनके पास तेल निर्यात के लिए कोई दूसरा विकल्प मौजूद नही है. ईरान पहले ही धमकी दे चुका है कि इस रास्ते से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला किया जा सकता है जिसके डर से समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है. विकसित देशों के समूह G7 ने स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त तेल बाजार में जारी करने के संकेत दिए हैं ताकि दुनिया को तेल की भारी किल्लत से बचाया जा सके.
नौसैनिक टकराव की बढ़ती आशंका
अमरीकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अभी तक उनकी नौसेना ने किसी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट यानी सुरक्षा घेरा नही दिया है लेकिन ट्रंप इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. अमरीका और इजरायल के बढ़ते हमलों के बीच ईरान ने हथियार डालने के बजाय टकराव का रास्ता चुना है जो वैश्विक शांति के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समंदर में छिड़ी यह जंग लंबी खिंचती है तो इससे न केवल तेल की कीमतें बढ़ेंगी बल्कि कई देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो सकती है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज पर टिकी हैं जहां बारूदी माइंस और मिसाइल बैटरियों ने मौत का जाल बुन दिया है.
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