उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़ी सबा हैदर ने अमेरिका में चुनाव जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने अमेरिका के इलिनॉय राज्य के 84वें डिस्ट्रिक्ट से स्टेट रिप्रेजेंटेटिव का चुनाव जीता है. सबा डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार थीं. उन्हें करीब 71 फीसदी वोट मिले. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को हराया. इस जीत के साथ सबा हैदर इलिनॉय की जनरल असेंबली में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं. उनकी इस कामयाबी से गाजियाबाद में रहने वाले उनके परिवार में खुशी का माहौल है. पिता सैयद अली को अपनी बेटी पर गर्व है. उनका कहना है कि सबा ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना हर माता-पिता देखते हैं.
सुबह 6 बजे मां को फोन कर दी जीत की खबर
सबा की मां के लिए बेटी की जीत का पल बेहद खास था. उन्होंने बताया कि पूरा परिवार रातभर चुनाव के नतीजों का इंतजार करता रहा. सभी की नजर अमेरिका से आने वाली खबरों पर थी. सुबह करीब 6 बजे सबा का फोन आया. उन्होंने सबसे पहले अपनी मां को फोन करके जीत की खबर दी. यह सुनकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मां के मुताबिक, बेटी का फोन और उसकी जीत की खबर उनके लिए जिंदगी के सबसे यादगार पलों में से एक है.
गाजियाबाद में हुई शुरुआती पढ़ाई, दो बार मिला गोल्ड मेडल
सबा हैदर की पढ़ाई गाजियाबाद से शुरू हुई. उन्होंने होली चाइल्ड स्कूल से शुरुआती शिक्षा हासिल की. इसके बाद राम चमेली चड्ढा विश्वास गर्ल्स कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की. यहां उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया.
आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में दाखिला लिया. यहां उन्होंने वाइल्डलाइफ साइंस में एमएससी की पढ़ाई की और एक और गोल्ड मेडल हासिल किया. यानी पढ़ाई के दौरान उन्होंने दो बार गोल्ड मेडल जीतकर अपनी काबिलियत साबित की.
शादी के बाद 2007 में चली गईं अमेरिका
परिवार के मुताबिक, साल 2007 में शादी के बाद सबा अपने पति के साथ अमेरिका चली गईं. वहां उन्होंने योग टीचर के तौर पर काम शुरू किया. वह लोगों को योग और सेहतमंद जीवनशैली के बारे में बताने लगीं. धीरे-धीरे उनका जुड़ाव वहां के स्थानीय लोगों और सामाजिक कामों से बढ़ने लगा. उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर भी काम किया. लोगों के बीच लगातार काम करने से उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनने लगी.
पहले काउंटी बोर्ड का चुनाव जीता, अब राज्य की राजनीति में पहुंचीं
सबा का राजनीति का सफर एक दिन में पूरा नहीं हुआ. उन्होंने पहले स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच काम किया. साल 2022 में उन्होंने ड्यूपेज काउंटी बोर्ड का चुनाव लड़ा था, लेकिन उस समय उन्हें जीत नहीं मिली. इसके बाद भी उन्होंने लोगों के बीच काम करना जारी रखा. साल 2024 में उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ा और ड्यूपेज काउंटी बोर्ड की सदस्य चुनी गईं. इसके बाद उन्होंने इलिनॉय राज्य की राजनीति में कदम बढ़ाया और अब 84वें डिस्ट्रिक्ट से स्टेट रिप्रेजेंटेटिव का चुनाव जीत लिया.
क्या होता है स्टेट रिप्रेजेंटेटिव का पद?
अमेरिका में हर राज्य की अपनी विधानसभा जैसी व्यवस्था होती है. इसे स्टेट लेजिस्लेचर कहा जाता है. इलिनॉय में इस व्यवस्था को जनरल असेंबली कहते हैं. स्टेट रिप्रेजेंटेटिव अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों की समस्याएं राज्य की विधानसभा में उठाते हैं. वे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सुरक्षा और दूसरी स्थानीय जरूरतों से जुड़े कानूनों और फैसलों पर काम करते हैं. इस पद पर जीत का मतलब है कि अब सबा हैदर इलिनॉय राज्य के 84वें डिस्ट्रिक्ट के लोगों का प्रतिनिधित्व करेंगी.
सबा ने अपनी चुनावी जीत के बाद मतदाताओं, परिवार, दोस्तों और चुनाव प्रचार में साथ देने वाले लोगों का आभार जताया. उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने करीब 15 महीने तक चुनाव क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को समझा. सबा की यह जीत सिर्फ एक चुनावी कामयाबी नहीं है. यह उनके लंबे सफर का नतीजा है. गाजियाबाद में पढ़ाई से शुरुआत करने वाली सबा ने अमेरिका में योग सिखाया, समाजसेवा की और फिर राजनीति में अपनी जगह बनाई. उनकी उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ गाजियाबाद और भारतीय समुदाय के लोग भी खुश हैं.