Jaafar Atallah Builds Clay Shelter: गाजा में जंग के दौरान अपना मकान तबाह हो जाने के बाद, एक फिलिस्तीनी कुम्हार ने अपने माता-पिता के रहने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है. जाफर अताल्लाह ने अपने परिवार के साथ तकरीबन 2 साल एक टेंट में बिताए. फिर एक दिन अपनी पारंपरिक कुम्हार वाली कला का इस्तेमाल करते हुए मिट्टी से एक गुंबद के आकार का घर बनाया. चूंकि सीमेंट और स्टील जैसी पारंपरिक कंस्ट्रक्शन मटेरियल मिलना मुश्किल था, इसलिए अताल्लाह ने करीब 15 लोगों को इकट्ठा किया और मिट्टी की ईंटों का इस्तेमाल करके एक टेंपरेरी शेल्टर बनाया.
मिट्टी के घर बनाने का तरीका
इससे पहले जाफर अताल्लाह नॉर्थ गाजा में कटोरे, फूलदान और मिट्टी के दूसरे बर्तन बनाकर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे. लेकिन, संघर्ष के दौरान उनका घर और पॉटरी वर्कशॉप दोनों तबाह हो गए, जिससे उन्हें वहां से निकलकर कहीं और शरण लेनी पड़ी. उनके परिवार में पीढ़ियों से रोटी पकाने के लिए पारंपरिक तंदूर बनाए जाते थे; इसी से इंस्पायर होकर उन्होंने सोचा कि क्या मिट्टी का इस्तेमाल करके एक बड़ा घर बनाया जा सकता है.
अपने रिश्तेदारों और दूसरे मददगारों (जिनमें उनके पिता भी शामिल थे) के साथ मिलकर, अताल्लाह ने मिट्टी, पानी, राख और कांच के पाउडर के अलग-अलग मिश्रणों से ईंटें बनाने का काम किया. उन्होंने इन ईंटों पर एक वाटरप्रूफ परत भी लगाई, ताकि वे मौसम की मार को झेल सकें. इस तरह बना गुंबद के आकार का ये ढांचा तंबुओं का एक बेहतर विकल्प है, क्योंकि टेंट हद से ज्यादा तापमान से बहुत कम सुरक्षा दे पाते हैं. अताल्लाह ने बताया कि मिट्टी के इस घर में गाजा की भीषण गर्मी के दौरान खाने-पीने की चीजों को स्टोर करना भी आसान हो गया है.
गाजा में गहराता आवास संकट
ये प्रोजेक्ट ऐसे वक्त में सामने आया है जब पूरे गाजा में घर और बुनियादी ढांचा बड़े पैमाने पर तबाह हो चुके हैं. कंस्ट्रक्शन मटेरियल की कमी के कारण, बेघर हुए परिवारों को अपने घरों की मरम्मत करने या उन्हें फिर से बनाने के लिए कुछ अलग तरीके खोजने पड़ रहे हैं. इजरायल ने सीमेंट और स्टील जैसी कुछ निर्माण सामग्रियों के आने पर रोक लगा दी है. उनका तर्क है कि इन चीजों का इस्तेमाल मिलिट्री के मकसद के लिए किया जा सकता है. मानवीय सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि इन प्रतिबंधों की वजह से पुनर्निर्माण के काम में मुश्किलें आ रही हैं.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजा में तकरीबन 19 लाख लोग बेघर हो गए थे या तंबुओं में रह रहे थे. इनमें से कई लोग आज भी खराब साफ-सफाई, भीषण गर्मी, ठंड और बाढ़ जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं.
घर बनाने के लिए इन चीजों का इस्तेमाल
घर बनाने के वैकल्पिक तरीकों पर काम करने वाले अताल्लाह अकेले नहीं हैं. टीनएज में मौजूद बहनें, ताला और फराह मूसा ने अपने घर पर बमबारी होने के बाद, कंक्रीट के टुकड़ों, मिट्टी, राख और कांच के पाउडर से ईंटें बनाने का इस्तेमाल किया. मई 2026 में, इन बहनों को स्विट्जरलैंड स्थित ‘अर्थ फाउंडेशन’ से उनकी इस पहल के लिए 12,500 डॉलर का ‘यूथ इनोवेशन अवार्ड’ मिला. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की वैकल्पिक सामग्रियों को पारंपरिक निर्माण सामग्री की जगह सीधे तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनकी मजबूती और सुरक्षा की उचित जांच होना जरूरी है.
पुनर्निर्माण की दिशा में एक छोटा कदम
जाफर अताल्लाह के मिट्टी के घर ये दिखाते हैं कि कैसे पारंपरिक स्किल और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की मदद से, विस्थापित परिवारों को फिर से बसने में मदद मिल सकती है. उनके काम के वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है, जिससे निर्माण की ऐसी ही तकनीकों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. फिर भी, सिर्फ इन वैकल्पिक आशियानों के सहारे गाजा में बड़े पैमाने पर होने वाले पुनर्निर्माण की जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता. लॉन्ग टर्म रिकवरी के लिए कंस्ट्रक्शन मटेरियल, टेक्निकल एक्सपर्टीज, बुनियादी ढांचे और डैमेज हो चुकी कम्यूनिटीज को फिर से बसाने के लिए जरूरी संसाधनों की जरूर होगी.