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सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी गाजा की तबाही, जहां नजर आते थे आलीशान घर; वहां अब सिर्फ मलबा और वीरान सड़कें

Gaza Before and After की सैटेलाइट तस्वीरों में Rafah, Khan Younis और North Gaza के इलाकों में युद्ध के बाद हुए बड़े बदलाव और तबाही दिखाई दे रही है.

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सैटेलाइट तस्वीरों में गाजा के कई इलाकों में युद्ध से हुई भारी तबाही नजर आ रही है. (Image- Google Earth)

गाजा में करीब तीन साल से जारी युद्ध ने पूरे इलाके का नक्शा बदल दिया है. हाल ही में अपडेट हुई गूगल मैप्स की सैटेलाइट तस्वीरों में तबाही साफ दिखाई दे रही है. कई इलाकों में पूरे के पूरे मोहल्ले मलबे में तब्दील हो चुके हैं और मैप में अब वहां सिर्फ सड़कों की हल्की-सी लकीरें नजर आती हैं. खेतों का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो चुका है, वहीं सदियों पुराने धार्मिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचा है या वे पूरी तरह मिट चुके हैं.

82 फीसदी इमारतों को नुकसान

संयुक्त राष्ट्र सैटेलाइट सेंटर यानी UNOSAT के मुताबिक, युद्धविराम के बाद गाजा में तबाह हुई इमारतों की संख्या 9 फीसदी बढ़ी है. UNOSAT के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में करीब 2 लाख इमारतें प्रभावित मिली थीं. UNRWA के अनुसार, गाजा की लगभग 82 फीसदी इमारतों को नुकसान पहुंचा है और इनमें करीब दो-तिहाई इमारतें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं. गूगल मैप्स की नई तस्वीरों के जरिए दक्षिण में राफाह से लेकर उत्तरी गाजा तक के इलाकों की युद्ध से पहले और अब की स्थिति की तुलना की गई है. राफाह की तस्वीरें इसी साल की हैं, जबकि उत्तरी गाजा की तस्वीरें 2025 और 2024 की हैं. इन तस्वीरों में कई जगहों पर बदलाव इतना बड़ा है कि पुराने और नए इलाके को पहचानना मुश्किल है.

तल अल-सुल्तान, राफाह

गाजा के साउथ शहर राफाह में युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में रिफ्यूजी फिलिस्तीनियों ने शरण ली थी. लेकिन मई 2024 में इजरायली सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद करीब 10 लाख लोगों को राफाह छोड़ना पड़ा. इनमें से ज्यादातर लोग पहले भी कई बार अपनी घर या जगह छोड़ चुके थे. UNRWA के शेल्टर खाली होने के बाद लोगों को खान यूनिस और मध्य गाजा के दीर अल-बलाह की तरफ जाना पड़ा. राफाह के वेस्ट में मौजूद तल अल-सुल्तान एक घनी आबादी वाला इलाका था. अब सैटेलाइट तस्वीरों में वहां घरों की जगह ज्यादातर रेत और मलबा नजर आता है.

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Image Source- Google earth (September 2026)

अल-मवासी, राफाह

अल-मवासी एक समुद्र किनारे पर कम आबादी वाला इलाका था, जहां रेत और खेती की जमीन थी. युद्ध की शुरुआत में इसे इजरायल ने ‘ह्यूमैनिटेरियन जोन’ बनाया था और फिलिस्तीनियों से वहां जाने को कहा. मई 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने राफाह में सैन्य कार्रवाई को लेकर हथियारों की सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी. इसके बावजूद कार्रवाई आगे बढ़ी और बड़ी संख्या में लोग अल-मवासी पहुंचे. बाद में इस इलाके में भी कई हमले हुए.
आज की सैटेलाइट तस्वीरों में कभी खाली दिखने वाला अल-मवासी टेंटों और बेघर परिवारों से भरा नजर आता है.

Image Source- Google earth (September 2026)

इंडोनेशियन इस्तिकलाल मस्जिद, खान यूनिस

खान यूनिस में UNOSAT के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में 51,885 प्रभावित इमारतें मिलीं, जो गाजा के किसी भी इलाके में सबसे ज्यादा थीं. यह इलाका खेती के लिए भी अहम था और यहां गाजा में सबसे ज्यादा कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा. खान यूनिस के मआन इलाके की इंडोनेशियन इस्तिकलाल मस्जिद भी युद्ध में तबाह हो गई. इसे युद्ध से दो साल पहले दोबारा खोला गया था.

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Image Source- Google earth (September 2026)

गाजा पोर्ट से जबालिया तक तबाही

गाजा गवर्नरेट में 51,530 प्रभावित इमारतें दर्ज की गईं, जिनमें अकेले गाजा शहर की 41,663 इमारतें थीं. गाजा पोर्ट, जो कभी मछली पकड़ने के कारोबार के लिए अहम था और करीब 1.10 लाख लोगों की रोजगार से जुड़ा था, वह बुरी तरह तबाह हुआ है. UN Food and Agriculture Organization (UNFAO) के मुताबिक, ज्यादातर मछली पकड़ने वाली नावें भी नष्ट हो गईं.

Image Source- Google earth (September 2026)

नॉर्थ गाजा में जुलाई 2025 तक 94 फीसदी कृषि भूमि प्रभावित थी. बेइत लाहिया और जबालिया जैसे इलाकों में बार-बार सैन्य कारवाई और लोगों की मदद पर रोक का असर पड़ा. जबालिया रिफ्यूजी कैंप, जो गाजा के आठ कैंपों में सबसे बड़ा है, की तस्वीरों में पूरे-पूरे ब्लॉक मलबे में बदले दिखाई दिए हैं. 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए युद्ध में 74,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए और 1.75 लाख से अधिक घायल हुए हैं. मलबे के नीचे अब भी कई लोगों के लापता होने के कारण असल संख्या ज्यादा होने का अंदाजा है. पिछले साल अक्टूबर के युद्धविराम के बाद भी 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत और करीब 5,000 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है.

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