अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने सबसे बड़े सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के पहले 24 घंटों का पूरा ब्यौरा जारी कर दिया है. यूएस सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने सोशल मीडिया पर उन घातक हथियारों की लिस्ट साझा की है, जिन्होंने ईरान के रक्षा तंत्र की कमर तोड़ दी है. इस हमले की सबसे बड़ी खासियत बी-2 स्टील्थ बॉम्बर रहे, जो सीधे अमेरिका से उड़कर ईरान पहुंचे और रडार की नजर से बचकर भीषण बमबारी की. इन विमानों ने 2000 पाउंड के भारी-भरकम बमों का इस्तेमाल कर ईरान के उन गुप्त ठिकानों को निशाना बनाया जो जमीन के काफी नीचे छिपे हुए थे. इसके साथ ही एफ-35 और एफ-22 जैसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट्स ने भी आसमान में अपनी बादशाहत कायम करते हुए ईरानी सुरक्षा घेरे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया.
समुद्र से आसमान तक घेराबंदी
अमेरिका ने इस हमले के लिए केवल हवाई ताकत ही नहीं, बल्कि अपनी नौसैनिक शक्ति का भी भरपूर इस्तेमाल किया है. परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर और मिसाइल गाइडेड डिस्ट्रॉयर जहाजों को खाड़ी में तैनात किया गया है. समंदर में मौजूद इन जहाजों ने टॉमहॉक मिसाइलों और अन्य घातक हथियारों से ईरानी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों को निशाना बनाया. सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका ने पैट्रियट और थाड जैसी एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों को भी हाई अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी ईरानी मिसाइल हमले को हवा में ही नाकाम किया जा सके. इसके अलावा एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और पी-8 निगरानी विमान लगातार सीमा पर नजर रख रहे हैं, जिससे दुश्मन की हर हरकत पर काबू पाया जा सके.
ईरान के इन महत्वपूर्ण ठिकानों पर हुआ प्रहार
पेंटागन ने साफ किया है कि इस बार उनके निशाने पर ईरान के परमाणु ठिकाने नहीं, बल्कि उसकी मुख्य सैन्य शक्ति थी. हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, आईआरजीसी के संयुक्त मुख्यालय और उनके एयरोस्पेस फोर्स के अड्डों को बनाया गया. अमेरिकी मिसाइलों और बमों ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल सेंटरों और एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है. इसके साथ ही ईरान के हवाई सुरक्षा तंत्र और सैन्य संचार प्रणालियों को भी तबाह कर दिया गया है ताकि उनकी सेना आपस में संपर्क न कर सके. अमेरिका का मकसद ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता को जड़ से खत्म करना था, जिसमें वह काफी हद तक सफल रहा है.
भविष्य की रणनीति और युद्ध की नई दिशा
ऑपरेशन के पहले चरण की सफलता के बाद अमेरिका ने अपने रसद और बैकअप प्लान को भी मजबूती से पेश किया है. सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130 जैसे बड़े मालवाहक विमानों के जरिए हथियारों और रसद की सप्लाई जारी है. हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों की मदद से लड़ाकू विमानों को लंबे समय तक मिशन पर रखा जा रहा है. सेंटकॉम ने बताया है कि यह तो बस शुरुआत है और आने वाले समय में वे अपनी रणनीति और तेज करेंगे. हालांकि कुछ गुप्त क्षमताओं का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन मौजूद हथियारों की लिस्ट ही ईरान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका का अगला कदम क्या होगा और ईरान इस भारी नुकसान से कैसे उबर पाएगा.
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