फ्लाईदुबई की फ्लाइट के कॉकपिट में 30 सितंबर को पायलट पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के चीफ प्रॉसिक्यूटर हमद सैफ अल शम्सी के मुताबिक, आरोपी की योजना विमान पर कब्जा करके उसे तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के पैसेंजर टर्मिनल से टकराने की थी. 29 वर्षीय आरोपी हमाम अल-हमामी ने कथित तौर पर इस हमले की पहले से तैयारी की थी और वह विमान को आत्मघाती मिशन में इस्तेमाल करना चाहता था. UAE के के मुताबिक, आरोपी 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावरों पर हुए आतंकी हमलों से प्रभावित था. उसके बयान के मुताबिक, विमान से इसी तरह का हमला करने का इरादा था. जांच में सामने आया कि 2017 में ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान उसके विचार कट्टरपंथ की ओर बढ़ने लगे थे. आरोप है कि उसने 30 सितंबर की घटना से पहले तेल अवीव की दो उड़ानें भी ली थीं, ताकि वह रास्ते और एयरपोर्ट को समझ सके.
कॉकपिट में कैप्टन पर किया हमला
घटना वाले दिन आरोपी ने कॉकपिट के अंदर फ्लाइट के कैप्टन स्मित मच्छार पर इमरजेंसी कुल्हाड़ी से हमला किया. उस समय वापसी की उड़ान के एक कैप्टन, क्रू मेंबर और कई यात्री मदद के लिए आगे आए. उन्होंने घायल कैप्टन को बचाया और आरोपी को पकड़ लिया. इसके बाद विमान को कंट्रोल किया और फ्लाइट को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर लैंड कराया गया. यात्रियों के मुताबिक, विमान अचानक करीब 17,000 फीट नीचे आ गया था.
आरोपी ने अकेले हमले की बात कही
रिपोर्ट के मुताबिक, हमाम अल-हमामी ने अपने वकील की मौजूदगी में दावा किया कि उसने यह कदम अकेले उठाया था. हालांकि, इस दावे की जांच की जा रही है. अधिकारी रिकॉर्डिंग, तकनीकी रिपोर्ट और दूसरे सबूतों की पड़ताल कर रहे हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका या किसी बड़े नेटवर्क से उसका संबंध तो नहीं था. घायल कैप्टन, वापसी की उड़ान के पायलट, को-पायलट और क्र सदस्यों के बयान भी दर्ज किए गए हैं.
कई एयरलाइंस में काम कर चुका था आरोपी
जांच में आरोपी के करियर की जानकारी भी सामने आई है. उसने 2020 से 2024 तक ओमान एयर में काम किया. इसके बाद 2025 की शुरुआत में वह रॉयल एयर मैरोक से जुड़ा और कुछ महीनों बाद जनवरी 2026 में फ्लाईदुबई में नौकरी करने लगा. ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में पढ़ाई के दौरान उसकी गतिविधियों की भी जांच हुई. आरोपी ने बताया कि वह रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RMIT) से जुड़ी एक मस्जिद में जाता था. वहां उसकी पहचान ‘माय सेंटर’ नाम के केंद्र से जुड़े कुछ लोगों से हुई. उसने दावा किया कि इस केंद्र का संचालन ‘अबू हमजा’ नाम का एक लेबनानी व्यक्ति करता था और इसे मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े एक संगठन का समर्थन मिलता था. इन दावों की अभी जांच हो रही है और अभियोजन की ओर से जारी जानकारी में यह अभी नहीं हैं. आरोपी के बयान के अनुसार, उसने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली चीजों को ज्यादा देखना शुरू कर दिया था और एक निजी कोच से बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेकर खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत किया था.
भर्ती के दौरान नहीं मिला कट्टरपंथ का संकेत
फ्लाईदुबई में भर्ती के समय आरोपी ने पेशेवर और सुरक्षा से जुड़ी जरूरी शर्तें पूरी की थीं. उसके पास पायलट लाइसेंस था, उसने अच्छे व्यवहार का सर्टिफिकेट सब्मिट किया था. हालांकि, इन प्रक्रियाओं में उसके कथित कट्टरपंथी विचारों या हमले की योजना का कोई संकेत सामने नहीं आया था.