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बिना गोली चलाए दुश्मन ढेर, क्या है ये रहस्यमयी सोनिक वेपन? वेनेजुएला से आई रिपोर्ट ने चौंकाया

US Forces use Sonic Weapon in Venezuela attack: न गोली चली और न मिसाइल और दुश्मन ढेर, वेनेजुएला से आ रही हालिया रिपोर्टों ने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है. एक सैनिक ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने वहां एक ‘सोनिक वेपन’ (Sonic Weapon) का इस्तेमाल किया है, जिसने बिना किसी धमाके के दुश्मन के खेमे में तबाही मचा दी.

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US Forces use Sonic Weapon in Venezuela attack: अमेरिकी सेना पर वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की कोशिश के दौरान एक रहस्यमयी ‘सोनिक वेपन’ के इस्तेमाल का दावा किया गया है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में वेनेजुएला के एक सैनिक ने कहा कि रेड के दौरान तेज ध्वनि तरंगों वाले हथियार का प्रयोग हुआ, जिससे सैनिकों की नाक से खून बहने लगा, कुछ को खून की उल्टी हुई और वे जमीन पर गिर पड़े. दावा यह भी है कि इस हथियार से रडार सिस्टम तक अक्षम हो गया. हालांकि अमेरिका ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन इस दावे के बाद सोनिक हथियारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.

क्या हुआ वेनेजुएला में?

स्थानीय रिपोर्टों और कुछ रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, हाल ही में वेनेजुएला के एक रणनीतिक इलाके में अचानक से बेहद तेज और असहनीय आवाज सुनी गई. इस आवाज के संपर्क में आने वाले सैनिकों और लोगों ने सिरदर्द, मतली और संतुलन खोने जैसी गंभीर समस्याओं की शिकायत की. चर्चा है कि यह अमेरिका द्वारा तैनात किया कोई विशेष ‘ध्वनि हथियार’ हो सकता है.

यह भी पढ़ें: क्या अब वेनेजुएला की कमान US के हाथ में? डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को बताया वहां का ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति’

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क्या हैं सोनिक हथियार?

सोनिक वेपन एक ऐसा उपकरण है जो बेहद उच्च तीव्रता वाली ध्वनि तरंगों (Sound Waves) का उपयोग करता है. यह हथियार दुश्मन को मारने के बजाय उसे शारीरिक रूप से अक्षम करने या पीछे हटने पर मजबूर करने के लिए बनाया गया है. इसे LRAD (Long Range Acoustic Device) भी कहा जाता है, जो मीलों दूर तक अपनी आवाज से असर दिखा सकता है. इसकी आवाज इतनी तेज होती है कि यह इंसान के कान के पर्दों को फाड़ सकती है और मानसिक संतुलन बिगाड़ सकती है. सोनिक हथियार ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल करके लक्ष्य को अक्षम करते हैं.

क्या असर पड़ता है, किन देशों के पास हैं?

इन सोनिक वेपन से तेज दर्द, चक्कर, संतुलन बिगड़ना, सुनने की क्षमता को नुकसान, नाक से खून और मानसिक असर हो सकता है. लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्थायी नुकसान की आशंका भी जताई जाती है. अमेरिका, चीन, रूस, इजरायल समेत कई देशों के पास इस तरह की तकनीक होने की जानकारी सामने आई है. कई जगह इन्हें भीड़ नियंत्रण के लिए भी इस्तेमाल किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे हथियारों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो यह भविष्य की जंग का नया और खतरनाक रूप साबित हो सकता है.

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अमेरिका और सोनिक वेपन का इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका पर इस तरह के हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगा है. इससे पहले क्यूबा में ‘हवाना सिंड्रोम’ (Havana Syndrome) के दौरान भी अमेरिकी राजनयिकों पर इसी तरह के गुप्त सोनिक हमलों की चर्चा हुई थी. हालांकि, वेनेजुएला के मामले में अभी तक आधिकारिक रूप से अमेरिका या वेनेजुएला सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

यह भी पढ़ें: ‘अमेरिका ने ठीक नहीं किया…’ अब किसने उठाई ट्रंप के फैसले के खिलाफ आवाज?

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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