यूरोपीय संघ ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पिछले महीने स्टील और एल्युमीनियम निर्यात पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क के प्रतिशोध में लगभग 21 बिलियन यूरो (2320 करोड़ रुपये) के अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लगाने को मंजूरी दे दी है। बुधवार को EU के 27 सदस्य देशों में से अधिकांश ने जुर्माने लगाए जाने के पक्ष में मतदान किया, जिनमें से कुछ टैरिफ अप्रैल के मध्य में प्रभावी होंगे। टैरिफ राजनीतिक रूप से संवेदनशील अमेरिकी राज्यों को ध्यान में रखकर लगाए गए हैं। इनमें लुइसियाना से सोयाबीन जैसे उत्पाद शामिल होंगे, जो हाउस स्पीकर माइक जॉनसन का गृह क्षेत्र है। इसके अलावा हीरे, कृषि उत्पाद, पोल्ट्री और मोटरसाइकिल उपकरण भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी सामान में कुछ पर 25 फीसदी तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है।
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चीन के ऊपर अमेरिका ने हाल ही में आयातित माल पर 104 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसके जवाब में ड्रैगन ने अमेरिका से आने वाले आयातित सामान पर 84 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। यूरोपीय संघ के कुछ टैरिफ अप्रैल के मध्य, तो कुछ मई के मध्य में लागू होंगे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार तीसरी सूची इस साल के अंत में 1 दिसंबर को लागू होगी। लक्षित सामान में से अधिकांश पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जबकि कुछ श्रेणियों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।
चीनी टैरिफ 10 अप्रैल से लागू
ट्रंप प्रशासन ने फ्रांस और अन्य जगहों से वाइन, शैंपेन और अन्य मादक पेय पदार्थों पर 200 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी गई थी। इसके बाद बॉर्बन (अमेरिकी व्हिस्की) को ब्लैक लिस्ट से हटा दिया गया था। उधर, चीनी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की थी कि वह सभी अमेरिकी वस्तुओं पर 84 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगा रहा है, जो पिछले 34 प्रतिशत से अधिक है। मंत्रालय ने साफ किया कि यह प्रतिशोधी टैरिफ 10 अप्रैल से लागू होंगे।
चीन की दो टूक, अंत तक लड़ेंगे
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया कि अगर अमेरिका अपने आर्थिक और व्यापार प्रतिबंधों को बढ़ाता है तो चीन आवश्यक जवाबी कार्रवाई करने और अंत तक लड़ने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। उसके पास सभी संसाधन है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चीनी टैरिफ पर फॉक्स बिजनेस नेटवर्क के समक्ष प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजिंग का टैरिफ लगाना ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है। उन्होंने कहा कि चीन को बातचीत करनी चाहिए।
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