अल नीनो के प्रभाव के बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के असामान्य रूप देखने को मिल रहे हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने 2027 की शुरुआत तक इसका प्रभाव बने रहने की आशंका जताई है. दुनिया के एक हिस्से में लगातार बारिश से लोग परेशान हैं, तो दूसरे हिस्से में सूखे रेगिस्तान में फूलों की चादर बिछ गई है. जापान की राजधानी टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश दर्ज की गई, जबकि दक्षिण अमेरिकी देश चिली के अटाकामा रेगिस्तान में भारी बारिश के बाद फूलों की करीब 200 प्रजातियां खिल उठीं. मौसम की इन घटनाओं के बीच अल नीनो एक बार फिर चर्चा में है. यह प्राकृतिक जलवायु घटना समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों को प्रभावित करती है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान का सामान्य पैटर्न बदल सकता है.
रेगिस्तान में फूलों की बहार
चिली का अटाकामा रेगिस्तान दुनिया के सबसे गर्म और सूखे रेगिस्तानों में शामिल है. लेकिन सितंबर में यहां भारी बारिश के बाद एक अनोखा नजारा देखने को मिला. करीब 200 प्रजातियों के फूलों के बीज फूट पड़े और बड़े इलाके में बैंगनी रंग के फूल खिल उठे. पर्यटकों ने इस नजारे की तस्वीरें शेयर की हैं. तस्वीरों में सूखी जमीन दूर तक फूलों से ढकी दिखाई दे रही है. अटाकामा प्रशांत महासागर और एंडीज पर्वतमाला के बीच स्थित है. यह चिली के उत्तरी तटीय क्षेत्र में करीब 1,600 किलोमीटर तक फैला है. जुलाई और अगस्त के दौरान चिली के कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई. कुछ जगहों पर बारिश 180 मिलीमीटर से अधिक रही. कुछ इलाकों में इतनी बारिश पहले दर्ज नहीं की गई थी.
टोक्यो में बारिश ने बढ़ाई परेशानी
टोक्यो में लगातार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, वहां लगातार 35 दिनों तक बारिश हुई. 1886 के बाद से बारिश का यह सबसे लंबा दौर बताया जा रहा है. इससे पहले 2019 में लगातार 33 दिनों तक बारिश दर्ज की गई थी. सितंबर में मध्य टोक्यो में सामान्य से करीब तीन गुना बारिश हुई. महीने के 14 दिनों तक सूरज दिखाई ही नहीं दिया. लगातार बारिश से सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई. हालांकि, टोक्यो की बारिश को केवल अल नीनो से जोड़ना सही नहीं होगा. मौसमी वर्षा प्रणालियों, तूफानों और कम दबाव वाले क्षेत्रों की भी इसमें भूमिका हो सकती है.
फरवरी 2027 तक रह सकता है असर
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आकलन के मुताबिक, अल नीनो दिसंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है और फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है. संगठन ने इसे 1950 के बाद के सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाक्रमों में से एक बताया है.