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भूकंप के भयंकर झटकों से फिर कांपा म्यांमार, आज सुबह आया 4.3 की तीव्रता वाला Earthquake

भूकंप लगातार म्यांमार की धरती को दहला रहा है। दिन में आए भूकंप के बाद ऑफ्टरशॉक लगते रहे और म्यांमार की धरती एक बार फिर भूकंप के जोरदार झटकों से कांपी। आज सुबह फिर भूकंप आया, इससे पहले देररात भी भूकंप आया था, जिसके चलते लोगों ने सारी रात खुले आसमान के नीचे सड़कों पर काटी।

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भूकंप से हिली धरती

म्यांमार की धरती देररात भूकंप के झटकों से फिर कांप गई। 28 मार्च दिन शुक्रवार को सुबह करीब 12 बजे आए 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप ने तबाही मचाई। इसके बाद दिनभर ऑफ्टरशॉक लगते रहे। वहीं देररात करीब 11:56 बजे म्यांमार में फिर भूकंप के झटके लगे, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 मापी गई। भूकंप के कारण दिनभर, रातभर लोग सड़कों पर खुले आसमान के नीचे बैठे रहे। आज सुबह फिर भूकंप आया है, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.3 मापी गई। रेस्कयू टीमें, पुलिस और प्रशासन बचाव अभियान में जुटा है। म्यांमार में शुक्रवार को आए भूकंप से कम से कम 150 लोग मारे गए हैं। इमारतें, पुल, मठ, मस्जिद समेत कई लोगों के घर ढह गए हैं। म्यांमार को भूकंप से भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है।

 

म्यांमार में ही मिला भूकंप का मुख्य केंद्र

म्यांमार में भूकंप से 150 लोगों की जान गई और 732 लोग घायल हैं। US जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, म्यांमार में सुबह करीब 12 बजे जो भूकंप आया, उसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.7 रही। इस भूकंप का केंद्र मध्य म्यांमार में मोनयवा शहर से लगभग 50 किलोमीटर (30 मील) पूर्व में मिला। पहले झटके के 12 मिनट बाद दूसरा झटका लगा। इस भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गई और इसका केंद्र सागाइंग से 18 किलोमीटर दूर दक्षिण में मिला। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे और जर्मनी के GFZ सेंटर फॉर जियोसाइंस के अनुसार, भूकंप का केद्र म्यांमार में ही धरती के नीचे 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप का मुख्य केंद्र बर्मा के मांडले शहर के पास था, जहां एक मस्जिद ध्वस्त हो गई थी।

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थाईलैंड भूकंप जान नहीं, म्यांमार से आया

भूकंप से म्यांमार के मांडले शहर में बन यूनिवर्सिटी में भी आग लग गई थी। इरावजी नदी पर बना विशाल पुल ढह गया। म्यांमार की राजधानी नेपिडो में सड़कों पर दरारें आ गईं। AFP न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि साल 1930 से 1956 के बीच सागैंग फॉल्ड के पास 7 की तीव्रता वाले 6 भूकंप आए थे। यह फ़ॉल्ट देश के बीचों-बीच से गुजरता है। इसलिए इस फॉल्ट में जब भी भूकंप आता है तो ऐसे ही तबाही मचती है। थाईलैंड भूकंप ज़ोन नहीं है, लेकिन यहां जो भूकंप आया, वह पड़ोसी देश म्यांमार से आया। बैंकॉक में इमारतों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं होता है, इसलिए यहां नुकसान अधिक हो सकता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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