पाताल में समा रही खेती की जमीन! 700 से ज्यादा गहरे गड्ढे, नासा की खतरनाक चेतावनी

Groundwater Crisis: दुनियाभर में भयंकर सूखे और भूजल के अंधाधुंध इस्तेमाल से खेती की जमीन पाताल में समाने लगी है. तुर्किये के सबसे बड़े अनाज उत्पादक इलाके ‘कोन्या प्लेन’ में अब तक 700 के करीब गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जो पूरे-के-पूरे खेतों को निगल रहे हैं. नासा की डरावनी चेतावनी के बीच भारत और अमेरिका जैसे देशों के लिए भी यह खतरे की बहुत बड़ी घंटी है.

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Photo Credit: AI

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Groundwater Crisis: इंसान की एक बड़ी लापरवाही और मौसम के बदलते मिजाज ने धरती की कोख को इस कदर खोखला कर दिया है कि अब उपजाऊ जमीन ही पाताल लोक में समाने लगी है. यह कोई डरावनी काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि तुर्किये (टर्की) की आंखों देखी हकीकत है. तुर्किये के मध्य इलाके में स्थित ‘कोन्या प्लेन’ को देश की ‘अनाज की टोकरी’ कहा जाता है. पूरे देश की 36% गेहूं और 35% चुकंदर की जरूरत अकेले इसी इलाके से पूरी होती है. लेकिन आज यहां के किसान खौफ के साए में जी रहे हैं क्योंकि उनके लहलहाते खेत रातों-रात गायब हो रहे हैं.

रातों-रात गायब हो रहे हैं खेत

ताजा वैज्ञानिक आंकड़ों और सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्षेत्र में अब तक 684 से ज्यादा विशालकाय सिंकहोल (जिन्हें स्थानीय भाषा में ओब्रुक कहा जाता है) बन चुके हैं और यह आंकड़ा तेजी से 700 के पार पहुंच रहा है. ड्रोन से ली गई तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं, जहां खेतों के बीचों-बीच सैकड़ों फीट गहरे और 100 फीट से ज्यादा चौड़े कुएं जैसे खौफनाक गड्ढे नजर आ रहे हैं. कई गड्ढे तो 30-30 मंजिला इमारतों जितने गहरे हैं, जो अचानक पूरी फसल को अपने अंदर निगल लेते हैं.

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चट्टानों का घुलना और नासा की चेतावनी

भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, कोन्या का यह इलाका चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की चट्टानों वाला क्षेत्र है. जब लंबे समय तक सूखा पड़ता है और किसान फसलों के लिए जमीन के नीचे से अंधाधुंध पानी (भूजल) खींचते हैं, तो पानी का स्तर अत्यधिक नीचे गिर जाता है. इसके बाद जमीन के अंदर की चट्टानें खोखली हो जाती हैं और ऊपर की भारी मिट्टी अपना सहारा खोकर अचानक भरभराकर नीचे धंस जाती है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने भी आगाह किया है कि तुर्किये में पानी के जलाशय पिछले 15 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं.

अमेरिका और भारत के लिए भी खतरे की घंटी

यह जानलेवा संकट सिर्फ तुर्किये तक सीमित नहीं है. अमेरिका के बड़े कृषि क्षेत्रों और भारत के पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में भी भूजल का दोहन रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पानी की हर बूंद को बचाने और फसलों के पैटर्न को बदलने पर तुरंत काम नहीं किया गया, तो भविष्य में भारत और अमेरिका के खेतों में भी ऐसे ही आत्मघाती सिंकहोल देखने को मिल सकते हैं. प्रकृति का यह साफ संदेश है- अगर हम समय रहते नहीं संभले, तो अन्न उपजाने वाली यह धरती ही इंसानी बस्तियों को निगलना शुरू कर देगी.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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