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MoU साइन होते ही बदले ट्रंप के सुर, कहा- ईरान के पास भी होनी चाहिए कुछ मिसाइलें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो खुद ईरानी की सभी मिसाइलों और ईरान के पास रखे मिसाइलों और अन्य हथियारों के जखीरे को खत्म करना चाहते थे वो ही अब अपने बयान से पलटते हुए नजर आ रहे हैं. दरअसल, उनका एक बयान इस समय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो खुद ईरानी की सभी मिसाइलों और ईरान के पास रखे मिसाइलों और अन्य हथियारों के जखीरे को खत्म करना चाहते थे वो ही अब अपने बयान से पलटते हुए नजर आ रहे हैं. दरअसल, उनका एक बयान इस समय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

बता दें कि ट्रंप ने जी-7 सम्मेलन के दौरान फ्रांस में ट्रंप ने कहा कि ईरान को कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें रखने की इजाजत दी जा सकती है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर दूसरे देशों के पास मिसाइलें हैं तो ईरान को भी कुछ रखने की अनुमति मिलनी चाहिए.

मिसाइलें कोई बड़ी समस्या नहीं- ट्रंप

वहीं, सम्मेलन में ट्रंप ने साफ किया कि मिसाइलें कोई बड़ी समस्या नहीं हैं क्योंकि वे सिर्फ एक जगह को नुकसान पहुंचाती हैं, लेकिन न्यूक्लियर हथियार पूरे ग्रह को तबाह कर सकते हैं. उन्होंने सऊदी अरब और कतर जैसे देशों का उदाहरण दिया जिनके पास मिसाइलें हैं.

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ईरान को भी मिलनी चाहिए छूट- ट्रंप

ट्रंप का कहना है कि ईरान को भी अनुपात में कुछ मिसाइलें रखने की छूट मिलनी चाहिए. इस बयान से अमेरिकी नीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि पहले ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने पर जोर दिया जा रहा था.

ईरान-यूएस के बीच समझौता

बता दें कि 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी. उस समय ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करना और उसके न्यूक्लियर हथियार बनाने की कोशिश को रोकना मुख्य लक्ष्य था. लेकिन अब ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे को कम महत्व दे रहा है.

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वहीं, ट्रंप ने कहा कि अगर यह समझौता नहीं होता तो और तीन-चार हफ्ते बमबारी जारी रखी जाती, लेकिन इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो जाता और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी तबाही आ जाती. ट्रंप ने कहा कि अगर हम बमबारी जारी रखते तो रोज 500-700 मिलियन डॉलर का खर्च होता. हम चार हफ्तों में हथियारों के भंडार खत्म कर देते.

समझौते को बताया आर्थिक तबाही से बचाने वाला

उन्होंने समझौते को आर्थिक तबाही से बचाने वाला बताया. ईरानी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने इस MOU पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. समझौते का पूरा टेक्स्ट अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिसकी वजह से आलोचना हो रही है.

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यह भी पढ़ें- ‘नाविकों की सुरक्षा भी जरूरी’, PM मोदी का ट्रंप को साफ संदेश, बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा

यूरेनियम स्टॉक पर क्या बोले ट्रंप?

बता दें कि यूएस-ईरान समझौते में ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को सौंपने की शर्त नहीं रखी गई है. यह स्टॉक 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त माना जाता है. इसके बजाय दोनों देश अगले दो महीनों में इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे.

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ट्रंप ने कहा कि ईरान इन स्टॉक तक पहुंच ही नहीं सकता क्योंकि अमेरिका ने उसके तीन मुख्य न्यूक्लियर साइटों को बमबारी से तबाह कर दिया है.

वहीं, ट्रंप ने ये दावा किया है कि न्यूक्लियर डस्ट मलबे के नीचे दबा हुआ है और सिर्फ अमेरिका व चीन के पास उसे निकालने का उपकरण है. उन्होंने इसे मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण बताया लेकिन व्यावहारिक रूप से कम मूल्यवान माना. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास अन्य जगहों पर भी कम संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक हो सकता है. ट्रंप ने फिर भी कहा कि अगले दो महीनों में यह मुद्दा चर्चा का मुख्य विषय रहेगा.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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