अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन 2026 के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के खिलाफ चौंकाने वाला फैसला लेकर उसकी घोषणा भी कर दी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने फैसला किया है कि इस साल के बाद इजरायल को अमेरिका से हर साल मिलने वाली 4 अरब डॉलर की आर्थिक मदद बंद कर दी जाएगी. लेकिन उन्होंने एक राहत देते हुए ऐलान किया है कि जब-जब जरूरत पड़ेगी, इजरायल को अमेरिका की ओर से हथियार दिए जाएंगे. वहीं जरूरत के अनुसार आर्थिक मदद भी दी जाएगी, लेकिन जरूरी होने पर, हर साल वाली मदद आज के बाद इजरायल को नहीं मिलेगी. इस फैसले से जुड़ा आदेश इजरायल को भी भेज दिया गया है और उनकी तरफ से रिसीविंग भी मिल गई है.
नेतन्याहू ने ट्रंप के फैसले से सहमति जताई
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बात हुई है. उन्होंने हर साल अमेरिका से मिलने वाली 4 अरब डॉलर की सालाना मदद रोकने पर सहमति जताई है. लेकिन अमेरिका की ओर से इजरायल को हथियार बेचे जाएंगे. वहीं इस फैसले से दोनों देशों के सालों पुराने सैन्य रिश्त बदलेंगे. आर्थिक मदद इसलिए रोकी है, क्योंकि इजरायल को अब अमेरिका से वित्तीय मदद की जरूरत नहीं है. इजरायल को सालाना आर्थिक मदद देने को लेकर डेमोक्रेट्स रिपब्लिकन पार्टी की आलोचना करते थे, लेकिन अब उनके मुंह बंद हो जाएंगे.
दिसंबर 2026 तक बंद होगी आर्थिक मदद
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के शो फॉक्स एंड फ्रेंड्स में कहा कि दिसंबर 2026 तक आर्थिक मदद रोकी जाएगी, लेकिन फंडिंग कैसे बंद की जाएगी, इस बारे में कह नहीं सकते. अमेरिका इजरायल समझौते के तहत सितंबर 2028 तक हर साल इजरायल को 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दी जाएगी. इजरायल को आर्थिक मदद को लेकर अमेरिका की ट्रंप सरकार आलोचना झेल रही थी. गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों में सहयोग को लेकर भी ट्रंप सरकार डेमोक्रेट्स की आलोचना का शिकार रही है. डेमोक्रेट्स का मानना है कि अमेरिका जरूरत से ज्यादा मदद इजरायल को दे रहा है.
बहुत अच्छे गहरे दोस्त हैं ट्रंप और नेतन्याहू
बता दें कि अमेरिका और इजरायल बहुत अच्छे दोस्त हैं. अमेरिका की ट्रंप सरकार ने हमास के खिलाफ गाजा में सैन्य अभियान चलाने में इजरायल की नेतन्याहू सरकार को सहयोग किया. इतना ही नहीं, ट्रंप सरकार ने गाजा को फिर से बसाने के लिए शांति योजना भी बनाई. इजरायल और हमास का युद्ध बंद कराया, लेकिन गाजा में इजरायल के हमलों से हुए नरसंहार को लेकर अमेरिका-इजरायल दोनों को आलोचना झेलनी पड़ी. इसके बाद इजरायल और अमेरिका ने मिल कर ईरान पर हमले किए. इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे अमेरिका ने आगे जारी रखा.
इजरायल नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों, इसलिए इजरायल ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ हरसंभव सहयोग किया. इजरायल ने लेबनान और यमन में भी आतंकी संगठनों के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. लेकिन इजरायल अब अमेरिका पर ईरान युद्ध को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने का दबाव बना रहा है.