रूस से तेल खरीदने पर भारत को टैरिफ की धमकी देने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब खुद पुतिन से डीजल खरीदेंगे. जी हां, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिका और वैश्विक बाजारों को डीजल की आपूर्ति करने पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप के मुताबिक, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल भेजेगा. इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और आगे 10 लाख टन की आपूर्ति की जाएगी. अतिरिक्त 30 लाख टन डीजल भी रूस अमेरिका को देगा.
भारत को रूसी तेल खरीदने पर टैरिफ की धमकी
अमेरिका-रूस समझौते ने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी दबाव और टैरिफ नीति पर बहस को एक नया मोड़ दे दिया है. भारत लंबे समय से अपने ऊर्जा हितों और सस्ते तेल की उपलब्धता को प्राथमिकता देता रहा है और रूस से तेल खरीदने पर भारत को अमेरिका टैरिफ की धमकी देता रहा है. सितंबर 2026 में भारत ने रूस से औसतन लगभग 1.75 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल यानी कुल भारतीय कच्चे तेल आयात का करीब एक-तिहाई तेल आयात किया था.
राष्ट्रपति ट्रंप ने डीजल के लिए जताया पुतिन का आभार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस के साथ बहुत बड़ा सौदा हुआ है, जिसके अनुसार अमेरिका में भारी मात्रा में तेल आ रहा है. अमेरिका को डीजल देने के लिए मैं रूसी राष्ट्रपति पुतिन को धन्यवाद देना चाहता हूं. रूस ने अमेरिका को नवंबर में 500000 मीट्रिक टन से डीजल देने का वादा किया है. उसके बाद एक मिलियन टन से ज्यादा तेल आएगा. बता दें कि अमेरिका और रूस में डीजल समझौता तब हुआ, जब यूक्रेनी डेलिगेशन अमेरिका में था और राष्ट्रपति ट्रंप से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत करना चाहता था.
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की व्यक्त की तीखी प्रतिक्रिया
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका-रूस के तेल सझमौते को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस को फंडिंग करने का आरोप लगाया है. जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका अगर रूस से तेल खरीदेगा तो इससे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में इनवेस्टमेंट होगी, जबकि अमेरिका को युद्ध खत्म कराना चाहिए, लेकिन अब युद्ध लंबा खींचेगा. अमेरिका ने पुतिन को एक तरह से गिफ्ट दिया है, लेकिन इससे वैश्विक शांति भंग होगी. रूस के साथ समझौता करने की कोशिशें कमजोर होंगी. क्योंकि रूस को पैसा मिलेगा तो युद्ध लड़ने के संसाधन मिलेंगे. 2 मजबूत बिजनेस पार्टनर्स ने बेहद कमजोर फैसला किया है.