अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए चौंकाने और डराने वाली खबर आई है। दरअसल, उनकी बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की कोशिश हुई है। अमेरिकी की जांच एजेंसियों ने एक खौफनाक साजिश का खुलासा किया है और बताया गया है कि उनका परिवार ईरान के आतंकियों के निशाने पर है। इवांका की हत्या की साजिश रचने का आरोप ईरान की एजेंसी IRGC पर लगा है। ईरान समर्थित इस आतंकी नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी ने इवांका की हत्या की योजना बनाई थी।
पूछताछ में बताई साजिश रचने की वजह
अमेरिकी जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में उसने खुलासा किया है कि वह 6 साल पहले अमेरिका के ड्रोन अटैक में मारे गए ईरान के सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। उसने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ा है और वहीं से ट्रेनिंग लेकर अमेरिका आया था। उसने इवांका ट्रंप की हत्या करने की पूरी प्लानिंग कर ली थी, लेकिन वह अपनी साजिश में कामयाब नहीं हो पाया।
आरोपी को ईरान और IRGC का समर्थन
अमेरिकी जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपी का नाम मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी है। वह 32 साल का है और इराक का रहने वाला है। वह सुलेमानी को अपना गुरु मानता था और जिस दिन उनकी मौत हुई थी, उसी दिन से ट्रंप के परिवार का मारने की फिराक में था। खुफिया इनपुट हाथ लगा है कि मोहम्मद बाकर अकेला इतनी बड़ी साजिश नहीं रच सकता। उसके पीछे ईरान की सरकार, सेना और IRGC का समर्थन है। उन्हीं की मदद से वह अमेरिका तक पहुंचा।
इवांका के घर का ब्लूप्रिंट बरामद हुआ
अमेरिकी जांच एजेंसी के अनुसार, सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को अल-सादी से फ्लोरिडा में बने इवांका ट्रंप के आलीशान घर का ब्लूप्रिंट मिला है। वह फ्लोरिडा में रहकर ही काफी समय से इवांका ट्रंप की रेकी कर रहा था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों को उसकी गतिविधियों पर शक होने लगा था, इसलिए उसे पकड़ लिया गया। वाशिंगटन में इराक एंबेसी के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने भी आतंकी मोहम्मद के इरादों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है।
IRGC से ट्रेनिंग लेकर पहुंचा अमेरिका
उन्होंने कहा है कि कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद से ही मोहम्मद अमेरिका जाने की फिराक में था। वह लोगों से भी कहता फिरता था कि उसे इवांका ट्रंप को मारना होगा। वह ट्रंप के पूरे परिवार को तबाह करना चाहता था। ट्रंप के घर को जलाकर राख कर देना चाहता था, जिस तरह अमेरिका के ड्रोन अटैक ने कमांडर सुलेमानी को तबाह किया था। इसके लिए वह IRGC से ट्रेनिंग ले रहा था और ईरान की सरकार के साथ-साथ सेना के संपर्क में भी था।
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