मिडिल ईस्ट में 40 दिनों तक जंग फिर 2 हफ्तों का सीजफायर। अब अफगानिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बैठक फेल होने के बाद दोनों देशों के बीच फिर विवाद शुरू हो गया है। अमेरिका शुरुआत से ही ईरान को परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए कह रहा है लेकिन उसे पूरा करने पर अड़ा था। हालांकि अब ईरान 5 साल के लिए परमाणु कार्यक्रम को सस्पेंड करने के लिए तैयार हो गया है। इससे अब परमाणु बम के कच्चे माल पर बवाल शुरू हो गया है।
परमाणु कार्यक्रम पर नया विवाद है कि अब ईरान में परमाणु बम के कच्चे माल यानी एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा। बता दें कि अभी ईरान के पास करीब 450 किलो 60 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम है। यह हफ्तों में हथियार ग्रेड बनने के लिए पर्याप्त है। इतने कच्चे माल से 10 से ज्यादा परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। अब रूस इस कच्चे माल को अपने पास रखने की बात कह रहा है। वहीं अमेरिका ईरान की शर्त पर तैयार नहीं है। ईरान के 5 साल के ऑफर को ठुकराकर अमेरिका पूरी तरह से परमाणु कार्यक्रम को बंद करने की बात कह रहा है।
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सोमवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही अमेरिका और क्षेत्रीय देशों से बात कर चुके हैं। रूस ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को अपने यहां सुरक्षित रखने को तैयार है। मामले में रूस का कहना है कि यह शांति समझौते का हिस्सा हो सकता है। रूस दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रखने वाला देश है और ईरान का पुराना दोस्त भी। कहा कि रूस को लगता है कि अगर वह यह सामग्री रख ले तो ईरान-अमेरिका युद्ध रुक सकता है। रूस की मध्यस्थ की भूमिका मजबूत हो जाएगी। रूस ने स्पष्ट किया कि ऑफर अब भी टेबल पर है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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क्या है एनरिच्ड यूरेनियम?
अमेरिका की धमकी के बाद से ईरान लगातार कह रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली और मेडिकल के लिए है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में ईरान के पास 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक है। तकनीकी रूप से देखा जाए तो सामान्य बिजली प्लांट के लिए 3-5 प्रतिशत एनरिचमेंट पर्याप्त होता है। यही 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचते ही यह कच्चा माल बम बनाने लायक हो जाता है। बता दें कि यह स्टॉक कुछ ही हफ्तों में परमाणु बम बना सकता है। अगर ये स्टॉक ईरान से हट गया तो ईरान परमाणु कार्यक्रम में कई साल पीछे चला जाएगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की 5 साल के ऑफर को ठुकरा दिया है। अमेरिका 20 साल या उससे ज्यादा समय तक कोई एनरिचमेंट नहीं चाहता। अमेरिका ईरान में रखे सारे एनरिच्ड यूरेनियम को बाहर निकलवाना चाहता है। ट्रंप प्रशासन शुरूआत से कह रहा है कि बिना स्टॉक हटाए और बिना स्थायी रोक के कोई समझौता नहीं होगा।
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