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‘खतरे में है ईसाई धर्म का अस्तित्व’, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, इस देश पर निगरानी रखने के आदेश

Christian Religion in Nigeria: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया में ईसाई धर्म के अस्तित्व को लेकर बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है और नाइजीरिया की निगरानी करने का आदेश दिया है. उन्होंने नाइजीरिया में ईसाई धर्म के पालकों की घटती संख्या के लिए कट्टरपंथी इस्लामवादियों को दोषी ठहराया है.

राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन पीस प्लान को लेकर लगातार बातचीत कर रहे हैं.

Christianity Existential in Danger: नाइजीरिया में ईसाई धर्म खतरे में है और इसके लिए कट्टरपंथी इस्लामवादी दोषी हैं, जिनकी वजह से ईसाई कम्यूनिटी में हिंसा फैल रही है और सामूहिक नरसंहार हो रहा है. इजारों ईसाइयों को मारा जा रहा है, इसलिए नाइजीरिया की निगरानी करने का आदेश देता हूं. अगर ऐसा नहीं किया गया तो नाइजीरिया क्रिश्चियन देश से मुस्लिम देश बन जाएगा. यह कहना है, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का, जिन्होंने 2 सांसदों रिले मूर और टॉम कोल को नाइजीरिया में ईसाई धर्म के लिए बढ़ते खतरे का मामला सुलझाने का आदेश दिया.

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ट्रंप ने तलब की है मामले की जांच रिपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि कांग्रेस सांसद रिले मूर और अध्यक्ष टॉम कोल सीनेट कमेटी के साथ मिलकर मामले की तुरंत जांच करें और रिपोर्ट दें, उसके बाद आगे का फैसला किया जाएगा. अमेरिका ईसाई धर्म और इसे मानने वालों पर हो रहे अत्याचारों को बर्दाश्त नहीं करेगा. नाइजीरिया ही नहीं कई देशों में ईसाई धर्म पर अत्याचार हो रहे है और यह देखकर अमेरिका चुप नहीं बैठ सकता. ईसाई धर्म को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा. इसके लिए मुस्लिम धर्म और मुसलमानों के खिलाफ जाना पड़ेगा तो जाएंगे, लेकिन अपने धर्म पर खतरा नहीं सहा जाएगा.

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हमला करके चुन-चुन कर मारे जाते ईसाई

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि नाइजीरिया के एक गांव में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें करीब 20 ईसाई मारे गए. साल 2024 दुनियाभर में धर्म के नाम पर मारे गए लोगों में 70 प्रतिशत लोग ईसाई धर्म के थे और नाइजीरिया निवासी थे. इस नरसंहार के लिए बोको हराम, इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) और फुलानी उग्रवादी चरवाहे जिम्मेदार हैं. ईसाई धर्म के प्रति बढ़ती हिंसा का जवाब देने के लिए अमेरिका को नाइजीरिया पर दबाव बढ़ाना चाहिए, क्योंकि पिछले कई सालों से नाइजीरिया में यह नरसंहार, हिंसा और अत्याचार जारी है, जिसे लिए नाइजीरियन सरकार को एक्टिव होना चाहिए.


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