बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच अहम मुलाकात हुई. इस बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने साफ कहा कि चीन चाहे जितना भी बड़ा और मजबूत हो जाए, वो किसी भी देश के लिए खतरा नहीं बनेगा. उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है. शी जिनपिंग ने कहा कि चीन ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया और ना ही किसी की जमीन पर कब्जा किया है. उन्होंने ये भी कहा कि चीन हमेशा बातचीत, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय नियमों के जरिए समस्याओं को हल करने में विश्वास रखता है. उनका कहना था कि अगर बड़े देश अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करेंगे, तो दुनिया में अस्थिरता बढ़ेगी.
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क्या है चीन का मकसद?
दरअसल, पिछले कुछ सालों में चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत, सैन्य क्षमता और ग्लोबल इम्पेक्ट को लेकर कई देशों में चिंता देखी जा रही है. अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ-साथ एशियाई देशों में भी ये सवाल उठता रहा है कि क्या चीन भविष्य में आक्रामक रुख अपनाएगा. ऐसे माहौल में चीन ये संदेश देना चाहता है कि उसका विकास शांतिपूर्ण है. इस बयान के पीछे चीन की एक बड़ी रणनीति मानी जा रही है. चीन फिलहाल अपने व्यापार, निवेश और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है. ब्रिटेन जैसे बड़े देश के साथ अच्छे रिश्ते बनाकर चीन ये दिखाना चाहता है कि वो टकराव नहीं, बल्कि सहयोग की नीति पर चल रहा है.
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बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा
बैठक में चीन और ब्रिटेन ने व्यापार, शिक्षा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात की. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी कहा कि ब्रिटेन और चीन के रिश्ते संतुलित और स्थिर होने चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग का ये बयान दुनिया को भरोसा दिलाने की कोशिश है कि चीन का बढ़ता कद वैश्विक शांति के खिलाफ नहीं है. आने वाले समय में ये देखना अहम होगा कि चीन अपने शब्दों को नीतियों और व्यवहार में कैसे दिखाता है.
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