अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने की आशंका के बीच दुनिया की नजर एक बेहद शक्तिशाली बम पर टिकी है. इसे ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ कहा जाता है. अमेरिकी सेना इस बम को ईरान के एनर्जी ठिकानों और न्यूक्लियर साइट्स पर गिराने को लेकर विचार कर रही है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसे हमले की योजनाएं तैयार की हैं, हालांकि इसके इस्तेमाल का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ‘महाबम’ ईरान के पहाड़ों के नीचे बनी सीक्रेट परमाणु सुरंगों को तबाह कर पाएगा?
क्या है ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’?
इस बम का आधिकारिक नाम GBU-43/B Massive Ordnance Air Blast (MOAB) है. इसका वजन करीब 9,800 किलोग्राम है और इसमें लगभग 8,500 किलोग्राम विस्फोटक होता है. इसकी लंबाई करीब नौ मीटर है. इसे इस तरह बनाया गया है कि यह जमीन से ऊपर हवा में फटकर बड़े इलाके में तेज धमाका करता है. इसका इस्तेमाल खुले में मौजूद सैनिकों, सैन्य उपकरणों, इमारतों और गुफाओं के प्रवेश द्वार जैसे ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, यह बम पहाड़ों के भीतर बहुत गहराई में बने ठिकानों को तबाह करने के लिए खास तौर पर नहीं बनाया गया है.
सद्दाम हुसैन से क्या है इसका कनेक्शन?
‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ नाम का संबंध इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना से है. सद्दाम हुसैन इराक के राष्ट्रपति थे और 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान उन्होंने ‘मदर ऑफ ऑल बैटल्स’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था. बाद में अमेरिका के इस शक्तिशाली बम को इसी तरह का नाम दिया गया. यह अमेरिकी हथियार है, जिसे 2000 के दशक की शुरुआत में बनाया गया था.
अमेरिका ने पहली और अब तक केवल एक बार इस बम का इस्तेमाल 13 अप्रैल 2017 को अफगानिस्तान में किया था. वहां इसे इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के गुफा और सुरंग वाले ठिकाने पर गिराया गया था. अफगान अधिकारियों ने बड़ी संख्या में लड़ाकों के मारे जाने और सुरंगों को नुकसान पहुंचने का दावा किया था.
क्यों तबाह हो जाएंगी ईरानी परमाणु सुरंग?
अमेरिका का मानना है कि ईरान ने पिकएक्स माउंटेन के नीचे न्यूक्लियर सुरंगें बना रखी हैं. इस पहाड़ के नीचे एक बड़ा अंडरग्राउंड बंकर बनाया जा रहा है. आशंका है कि यहां खतरनाक परमाणु उपकरण रखे जा सकते हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं हुआ है कि वहां क्या मौजूद है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस परिसर के कुछ हिस्से जमीन से करीब 90 से 137 मीटर नीचे हो सकते हैं. पहाड़ के अंदर बने ऐसे ठिकानों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है. MOAB का धमाका सुरंगों के रास्ते, आसपास की सड़कों और जमीन के ऊपर बने ढांचों को तबाह कर सकता है, लेकिन इससे पहाड़ के अंदर मौजूद मुख्य ठिकाना नष्ट हो जाए, इसकी गारंटी नहीं है. ईरान ने सुरंगों के प्रवेश द्वारों और आसपास के रास्तों को मजबूत किया है. ऐसे में बम के धमाके का असर अंदर तक पहुंचना और भी कठिन हो सकता है.
MOAB और ‘बंकर बस्टर’ में क्या अंतर है?
अमेरिकी सेना के पास जमीन के नीचे बने मजबूत ठिकानों पर हमला करने के लिए GBU-57 नाम का बम भी है. इसे ‘बंकर बस्टर’ कहा जाता है. इसका वजन करीब 13,600 किलोग्राम है और इसे जमीन तथा मजबूत कंक्रीट की परतों को तोड़कर अंदर विस्फोट करने के लिए बनाया गया है. MOAB बड़े इलाके में धमाके से तबाही मचाने के लिए बनाया गया है, जबकि GBU-57 का मुख्य उद्देश्य जमीन के भीतर मौजूद ठिकानों को निशाना बनाना है. अमेरिका जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के दौरान GBU-57 का इस्तेमाल कर चुका है. फिर भी पिकएक्स माउंटेन जैसे गहरे जमीन के नीचे बने ठिकाने को पूरी तरह नष्ट करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.