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वियतनाम खरीदेगा भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, जानें क्या है और क्यों है खास, कौन-कौन से देश खरीद चुके अबतक?

फिलीपींस और इंडोनेशिया के बाद वियतनाम ब्रह्मोस मिसाइल के लिए भारत के साथ डील कर सकता है. फिलीपींस मिसाइल खरीदकर तैनात कर चुका है. इंडोनेशिया डिलीवरी का इंतजार कर रहा है और वियतनाम डील पर साइन करने वाला है.

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भारत और वियतनाम में ब्रह्मोस मिसाइल के लिए डील साइन हो सकती है. Credit- Facebook (United News of India- UNI)

भारत और वियतनाम के बीच ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर करीब 600 से 700 मिलियन डॉलर की डील हो सकती है. प्रधानमंत्री मोदी और वियतनाम के प्रधानमंत्री ली मिन हंग की मुलाकात में ब्रह्मोस मिसाइल डील पर चर्चा होगी. वहीं अगर डील फाइनल हो गई तो वियतनाम भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दक्षिण-पूर्व एशिया का तीसरा देश बन जाएगा. अब से पहले फिलीपींस और इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीद चुके हैं. वहीं वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की डील होने से दोनों देशों के रक्षात्मक संबंध पहले से और ज्यादा मजबूत हो जाएंगे.

ब्रह्मोस से तटीय सुरक्षा मजबूत करेगा वियतनाम

भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को लेकर डील साइन हो चुकी है, लेकिन कुछ कारणों से इसकी घोषणा नहीं की गई थी. लेकिन अब वियतनाम के प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद डील की घोषणा होने से दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय सुरक्षा और वियतनाम की तटीय सुरक्षा मजबूत हो जाएगा. भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदकर वियतनाम समुद्री खतरों से निपटने की रणनीति बनाएगा. मिसाइल के अलावा वियतनाम भारत से मिसाइल के लिए बैटरियां खरीदेगा. ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी लेगा.

क्या है ब्रह्मोस मिसाइल और कितनी है ताकतवर?

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक है. इसकी स्पीड 3704 किलोमीटर प्रति घंटा है और रेंज करीब 290 किलोमीटर है. यह मिसाइल जमीन, समुद्र या हवा से लॉन्च की जा सकती है और कम ऊंचाई से उड़कर टारगेट तक सटीक वार करने में सक्षम है. दुश्मन के लिए इस मिसाइल को रोकना बेहद मुश्किल है. इसकी स्पीड और रेंज के चलते दक्षिण-पूर्व एशिया के देश इसे खरीदना चाहते हैं, ताकि अपने नौसैनिक बेड़े में इसे शामिल करके अपनी तटीय सुरक्षा मजबूत कर सकें. यह मिसाइल एंटी-एक्सेस और एरिया-डेनियल कैपेसिटी के साथ दुश्मनों के जहाजों को तटों तक आने से रोकती है.

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फिलीपींस और इंडोनेशिया खरीद चुके मिसाइल

वियतनाम से पहले दक्षिण-पूर्व एशियाई देश फिलीपींस और डंडोनेशिया भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीद चुके हैं. फिलीपींस ने साल 2022 में 375 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस मिसाइल भारत से खरीदी थीं. 3 बैटरियां भी खरीदी थीं और उनकी डिलीवरी भी हो चुकी है. फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ने साल 2026 में भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल के लिए समझौता किया. वहीं अब वियतनाम तीसरा देश है, जो भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल के लिए भारत से डील साइन कर चुका है, बस घोषणा होनी बाकी है. थाईलैंड और मलेशिया भी भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की इच्छा जता चुके हैं.

ब्रह्मोस मिसाइल की डील की राह में चुनौतियां

वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की डील होने के बाद आगे कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है. जैसे ब्रह्मोस मिसाइल की डिलीवरी, इसके रखरखाव और इसे चलाने की ट्रेनिंग देने में मुश्किलें आ सकती हैं. वियतनाम ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर लंबे समय तक रक्षा सहयोग की उम्मीद भारत से कर रहा है और इस राह में चीन के कारण मुश्किलें आ सकती हैं. एयर-लॉन्च्ड वर्जन या अपग्रेडेड रेंज वाले वर्जन की मांग बढ़ सकती है और इस मांग को पूरा करना भारत के लिए आसान नहीं होगा. फिर भी भारत और वियतनाम की डील और दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रह्मोस की मौजूदगी क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होगी.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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