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बांग्लादेश में मकर संक्रांति मनाने पर दी धमकी, सरेआम मुनादी करते फिर रहे जमात के नेता, कहा- मनाया तो भुगतेंगे नतीजे

बांग्लादेश में पिछले कुछ दिनों में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं. अकेले दिसंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं सामने आई हैं.

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जमात-ए-इस्लामी के नेताओं का मुनादी करते हुए वीडियो भी सामने आया है.

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के बीच अब कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने हिंदू त्योहारों को लेकर निशाना साधा है. जमात-ए-इस्लामी ने मकर संक्रांति पर संगीत बजाने, पतंग उड़ाने और किसी भी प्रकार का उत्सव मनाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. बता दें, बांग्लादेश में मकर संक्रांति को शक्रेन कहा जाता है और यह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.

जमात-ए-इस्लामी के नेताओं ने सोशल मीडिया और हिंदू बहुल इलाकों में बाकायदा मुनादी करते हुए हिंदुओं को हिदायत दी है कि वे ‘इस्लामी मूल्यों’ का उल्लंघन न करें. साथ ही कहा है कि यदि इन आदेशों की अनदेखी की गई, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. इस फरमान के बाद ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों में डर का माहौल है.

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मकर संक्रांति या शक्रेन बांग्लादेश में सदियों से 14 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाने वाला त्योहार है. इसमें पतंगबाजी, तिल-गुड़ के पकवान और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होते हैं. पिछले कुछ वर्षों में, कट्टरपंथियों ने इसे ‘गैर-इस्लामी’ बताकर निशाना बनाना शुरू किया है. पिछले साल भी ढाका और चटगांव में उत्सव मना रहे लोगों पर जमात समर्थकों ने हमले किए थे.

बता दें, बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से अल्पसंख्यकों पर हमलों की संख्या बढ़ गई है. बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के एक बयान के मुताबिक, अकेले दिसंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं सामने आई हैं. इनमें 10 हत्याएं, लूटपाट और आगजनी के 23 मामले, डकैती और चोरी की 10 घटनाएं, झूठे ईशनिंदा के आरोप में हिरासत में लेने और टॉर्चर करने के चार मामले, रेप की कोशिश का एक मामला और मारपीट की तीन घटनाएं शामिल हैं. इसके अलावा अल्पसंख्यकों के घरों, मंदिरों और बिजनेस को निशाना बनाया गया है.

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कट्टरपंथियों के बढ़ते प्रभाव के कारण अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है. कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन इन कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में विफल रहा है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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