बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के बीच अब कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने हिंदू त्योहारों को लेकर निशाना साधा है. जमात-ए-इस्लामी ने मकर संक्रांति पर संगीत बजाने, पतंग उड़ाने और किसी भी प्रकार का उत्सव मनाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. बता दें, बांग्लादेश में मकर संक्रांति को शक्रेन कहा जाता है और यह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.
जमात-ए-इस्लामी के नेताओं ने सोशल मीडिया और हिंदू बहुल इलाकों में बाकायदा मुनादी करते हुए हिंदुओं को हिदायत दी है कि वे 'इस्लामी मूल्यों' का उल्लंघन न करें. साथ ही कहा है कि यदि इन आदेशों की अनदेखी की गई, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. इस फरमान के बाद ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों में डर का माहौल है.
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मकर संक्रांति या शक्रेन बांग्लादेश में सदियों से 14 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाने वाला त्योहार है. इसमें पतंगबाजी, तिल-गुड़ के पकवान और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होते हैं. पिछले कुछ वर्षों में, कट्टरपंथियों ने इसे 'गैर-इस्लामी' बताकर निशाना बनाना शुरू किया है. पिछले साल भी ढाका और चटगांव में उत्सव मना रहे लोगों पर जमात समर्थकों ने हमले किए थे.
बता दें, बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से अल्पसंख्यकों पर हमलों की संख्या बढ़ गई है. बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के एक बयान के मुताबिक, अकेले दिसंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं सामने आई हैं. इनमें 10 हत्याएं, लूटपाट और आगजनी के 23 मामले, डकैती और चोरी की 10 घटनाएं, झूठे ईशनिंदा के आरोप में हिरासत में लेने और टॉर्चर करने के चार मामले, रेप की कोशिश का एक मामला और मारपीट की तीन घटनाएं शामिल हैं. इसके अलावा अल्पसंख्यकों के घरों, मंदिरों और बिजनेस को निशाना बनाया गया है.
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कट्टरपंथियों के बढ़ते प्रभाव के कारण अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है. कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन इन कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में विफल रहा है.