Bangladesh Protest: बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग सैलरी को लेकर हो रहे हिंसक विरोध-प्रदर्शनों की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. सैकड़ों कारखानों ने अपना कामकाज रोक दिया है और तकरीबन 10 लाख मजदूर इससे प्रभावित हुए हैं. ये प्रदर्शन ढाका, गाजीपुर, सावर और अन्य औद्योगिक केंद्रों तक फैल गए हैं, जिससे देश की पहले से ही संघर्ष कर रही अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. 31 अक्टूबर से तेज हुए ये विरोध-प्रदर्शन 2 नवंबर को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहे. मजदूर 30000 टका के मासिक न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं, जबकि अभी उन्हें 12500 टका मिल रहा है.
हिंसक झड़पें और आगजनी
गाजीपुर में तब हिंसा भड़क गई जब मजदूरों ने ढाका-तंगेल राजमार्ग को जाम कर दिया और पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई. इस दौरान कम से कम 30 लोग घायल हो गए और कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई. ढाका के मीरपुर इलाके में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस, वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल करना पड़ा. पुलिस की एक गाड़ी में आग भी लगा दी गई. गाजीपुर, सावर और अशुलिया से आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं.
‘बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन’ के मुताबिक, वीकेंड पर कम से कम 529 कारखानों ने अस्थायी रूप से बंद रहने का ऐलान किया, जिससे तकरीबन 987190 मजदूर प्रभावित हुए. सोमवार को कुछ कारखानों में काम फिर से शुरू हुआ, लेकिन विरोध-प्रदर्शन जारी रहे.
मजदूर ज्यादा वेतन की मांग क्यों कर रहे हैं?
मजदूरों का कहना है कि भोजन, घर, ट्रांसपोर्ट और हेल्थकेयर से जुड़े खर्च बढ़ने के कारण उनका मौजूदा वेतन नाकाफी हो गया है. मिनिमम सैलरी आखिरी बार दिसंबर 2023 में 8000 टका से बढ़ाकर 12500 टका की गई थी. हालांकि मैन्युफैक्चरर्स ने चेतावनी दी है कि अगर इसे बढ़ाकर 30000 टका किया जाता है, तो कई कारखाने बंद हो सकते हैं. वर्ल्ड बैंक ने कमजोर निवेश, घटते निर्यात और लगातार बनी हुई महंगाई का हवाला देते हुए, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए बांग्लादेश की GDP ग्रोथ सिर्फ 3.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.
सरकार ने उछाला शेख हसीना का नाम
मजदूरों की मांगों पर विचार करने के लिए श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने 1 नवंबर को 6 सदस्यीय ‘न्यूनतम वेतन बोर्ड’ के गठन का ऐलान किया. इस बीच सरकार ने प्रतिबंधित ‘अवामी लीग’ और दूसरे राजनीतिक समूहों पर इस अशांति का फायदा उठाने का आरोप लगाया है. गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया कि सीमा पार के कुछ लोग अशांति फैलाने को बढ़ावा दे रहे हैं. ये घटना पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के दिसंबर में भारत से वापस लौटने की संभावना के बीच सामने आए हैं. शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश से चली गई थीं और उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े एक मामले में मौत की सजा का खतरा है. बांग्लादेश के सामने अब कारखानों का कामकाज बहाल करने, श्रमिकों की वेतन से जुड़ी मांगों को पूरा करने और निर्यात पर निर्भर अपनी इकॉनमी में और ज्यादा रुकावट को रोकने की चुनौती है.