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बांग्लादेश में बदलाव की आहट, सर्वे ने दिखाया नई सरकार का रोडमैप, पता चल गया जनता का मूड

बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव से पहले आए सर्वे ने राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी है. बीएनपी आगे दिख रही है, जबकि भारत-विरोधी माने जाने वाले समूहों का असर सीमित बताया जा रहा है.

Credit: Social Media

बांग्लादेश में आम चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. चुनाव से पहले आए एक बड़े सर्वे में ये अंदाजा लगाया गया है कि देश की राजनीति किस दिशा में जा सकती है और अगला प्रधानमंत्री कौन हो सकता है. इस सर्वे में बड़ा मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी समेत बाकी दलों के बीच बताया गया है. सर्वे के मुताबिक, बीएनपी इस समय सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. अगर अभी चुनाव होते हैं, तो बीएनपी और उसके सहयोगी दलों को संसद में बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है.

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जमात-ए-इस्लामी को लेकर क्या है राय?

बीएनपी लंबे समय से सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है और इस बार जनता के बीच उसकी पकड़ पहले से बेहतर बताई जा रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है. वहीं दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े दलों को लेकर कहा जा रहा है कि उनका असर सीमित रह सकता है. इन्हें अक्सर भारत-विरोधी सोच से जोड़कर देखा जाता है. सर्वे में बताया गया है कि आम मतदाता इस बार ज्यादा ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और देश की अर्थव्यवस्था पर दे रहा है, ना कि कट्टर विचारधाराओं पर. इसी वजह से भारत-विरोधी एजेंडे वाले समूहों को व्यापक समर्थन मिलने की संभावना कम दिखाई गई है.

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युवा मतदाताओं का खास रोल

सर्वे में ये भी सामने आया है कि युवा मतदाता इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं. युवा वर्ग रोजगार के अवसर, बेहतर भविष्य और राजनीतिक स्थिरता चाहता है. कई युवा मतदाता पारंपरिक राजनीति से हटकर व्यावहारिक मुद्दों पर वोट देने की बात कर रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव का असर सिर्फ बांग्लादेश की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा. इसका प्रभाव भारत-बांग्लादेश संबंधों और पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति पर भी पड़ सकता है. कुल मिलाकर, चुनाव से पहले आया ये सर्वे बताता है कि सत्ता की दौड़ में बीएनपी आगे है और भारत-विरोधी समूहों की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही है.

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