मिडिल ईस्ट में तनाव की खबरों के बीच सऊदी अरब, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और जॉर्डन ने संयुक्त रूप से खुला पत्र जारी कर ईरान और उसके प्रॉक्सी समूहों द्वारा किए जा रहे हमलों की कड़ी भर्त्सना की है और चेतावनी दी है कि वे अब उनके और उनके प्रॉक्सी समूहों के हमलों को और बर्दाश्त नहीं करेंगे. इन देशों ने अपने संयुक्त बयान में स्पष्ट कहा कि ईरान द्वारा सीधे या उसके समर्थित प्रॉक्सी समूहों और सशस्त्र गुटों के माध्यम से किए गए हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रतिकूल हैं. इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया गया है.

इराक की जमीन का इस्तेमाल बंद हो

खाड़ी देशों ने अपने पत्र में इराक के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों का हवाला देते हुए एक बड़ी मांग रखी है. उन्होंने कहा है कि इराक की जमीन से सक्रिय मिलिशिया और सशस्त्र समूहों द्वारा जो हमले किए जा रहे हैं, उन्हें फौरन बंद किया जाए. यह सीधे तौर पर उन गुटों की ओर इशारा है जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है.
इन देशों ने इराक के साथ अपने पुराने संबंधों का हवाला देते हुए इराक सरकार से अपील की कि वह अपनी भूमि से ऐसे हमलों को तुरंत रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए. इससे क्षेत्रीय संबंधों को बनाए रखने और आगे बढ़ते तनाव को रोका जा सके.

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आत्मरक्षा के लिए एकजुट होने की चेतावनी

इस पत्र की सबसे बड़ी बात 'आत्मरक्षा के अधिकार' का जिक्र है. इन 6 देशों ने साफ कर दिया है कि अगर हमले नहीं रुके, तो वे UN Charter के तहत अपनी सुरक्षा के लिए अकेले या फिर 'सामूहिक' रूप से जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय करने का उन्हें अधिकार है. इन देशों ने साफ संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता उनके लिए अहम है और किसी भी तरह की अस्थिरता या आतंकी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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