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स्मित मच्छार के हमलावर के सपोर्ट में आया 'अलकायदा', फ्लाईदुबई के विमान को बताया 'जायानिस्ट UAE प्लेन'

FlyDubai Flight Attack: ‘फ्लाईदुबई’ की फ्लाइट के ओमानी को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी का यमन बेस्ड अल-कायदा ग्रुप ने तारीफ की और इस विमान को ‘जायानिस्ट यूएई प्लेन’ बताया है.

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ओमानी को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी (Photo-X)

FlyDubai Hijack Attempt: यमन में अल-कायदा से जुड़ी एक मैगजीन ने इजरायल जा रही ‘फ्लाईदुबई’ की फ्लाइट पर कब्जा करने की नाकाम कोशिश की तारीफ की है. इस घटना में ओमान का को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी शामिल था. ग्रुप ने इस विमान को ‘जायानिस्ट UAE प्लेन’ कहा और इसकी तुलना 11 सितंबर के हमलों से की. हालांकि यमन बेस्ड ‘अल-कायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला’ (AQAP) ने 30 सितंबर की इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है और न ही आधिकारिक तौर पर अल-हम्मामी को अपना सदस्य या सहयोगी बताया है.

फ्लाईदुबई FZ1073 में क्या हुआ था?

फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 ने 30 सितंबर को सुबह करीब 7:05 बजे दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी. फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि विमान तकरीबन 34,000 फीट की ऊंचाई तक गया और फिर कई बार खतरनाक तरीके से नीचे आया.

इस उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर झगड़ा हुआ. आरोप है कि अल-हम्मामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला किया, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए और कुछ वक्त के लिए विमान पर कंट्रोल बिगड़ गया. जब जेट तेजी से नीचे आया, तो मच्छार कॉकपिट के फर्श पर बुरी तरह घायल हालत में पाए गए.

यह भी पढ़ें- कौन थे वो 2 मिस्ट्री पायलट? जिन्होंने 17000 फीट नीचे गिर चुकी फ्लाईदुबई फ्लाइट को किया कंट्रोल? रोका बड़ा हादसा

बाद में पैसेंजर्स और क्रू मेंबर कॉकपिट में दाखिल हुए और को-पायलट को काबू में किया. आखिरकार विमान लगभग 15000 फीट की ऊंचाई पर स्टेबल हो गया. इसके बाद इसके ट्रांसपोंडर को कोड 7500 पर सेट किया गया, जो इंटरनेशनल लेवल पर एक रिकॉग्नाइज्ड सिग्नल है और गैर-कानूनी दखल या हाईजैकिंग का इशारा देता है.

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सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग

इसके बाद फ्लाइट में सफर कर रहे 2 रिजर्व पायलटों ने विमान का कंट्रोल संभालने में मदद की. फ्लाइट का रुख उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबुक शहर की तरफ मोड़ा गया और लोकल टाइम के मुताबिक सुबह करीब 9:45 बजे इसे सुरक्षित रूप से उतारा गया.

AQAP की मैग्जीन ने घटना को 9/11 से जोड़ा

AQAP की अनऑफिशियल मैग्जीन ‘अल-बयान’ ने इस घटना पर अपने संपादकीय का शीर्षक ’11 सितंबर और 30 सितंबर के बीच’ रखा. पत्रिका ने कहा कि अगर हाईजैकिंग कामयाब हो जाती तो रीजन में बैलेंस ऑफ पावर बदल सकता था और तर्क दिया कि इजरायल और अमेरिका को निशाना बनाने वाले हमलों से मुसलमानों को फायदा हो सकता था. इन कमेंट्स ने अल-हम्मामी के इरादों और बैकग्राउंड पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक सऊदी मैगजीन ने उनके एविएशन करियर और 2024 में मिले कथित चरमपंथी मटीरियल के बारे में भी रिपोर्ट दी है, जबकि सीरिया में उनके रहने के वक्त को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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