पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब और भी ज्यादा खतरनाक मोड़ ले चुका है. जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और एक जवान अभी भी लापता है. वहीं, इस युद्ध में अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है. इस घटना ने क्षेत्र में तनाव को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, जॉर्डन स्थित सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर ईरान समर्थित बलों ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया. हमले में कई सैनिक घायल भी हुए हैं. मृतकों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है.
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब देगा ईरान
वहीं, दूसरी ओर ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब और अधिक आक्रामक तरीके से देगा. ईरानी नेतृत्व का कहना है कि यदि अमेरिका ने उसके सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखे, तो हम इसका जवाब पहले से कहीं अधिक आक्रामकता से देंगे. इसी बीच ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी देशों के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है.
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए अभियान जारी रहेगा. अमेरिकी सेना लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों, सर्विलांस सिस्टम और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर हवाई हमले कर रही है. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की हमले करने की क्षमता को सीमित करना और उसके परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाए रखना है.
यह भी पढ़ें- ईरान का पलटवार, जॉर्डन में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हमला, फेल हुए पैट्रियट इंटरसेप्टर
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा युद्ध का असर
इस बीच, युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है.
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है. हालांकि मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका और ईरान फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं हैं. ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
18 जून को हुआ समझौता 18 जुलाई को हुआ खत्म
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ शांति समझौता शनिवार को पूरी तरह टूट चुका है. ईरान ने साफ ऐलान किया है कि वह अब इस समझौते का पालन नहीं करेगा, क्योंकि उसके मुताबिक अमेरिका पहले ही अपने सारे वादे तोड़ चुका है.
हमले नहीं रूके तो शुरू होगा आक्रामक सैन्य अभियान- ईरान
ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व प्रमुख मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि यदि हवाई हमले इसी तरह जारी रहे, तो ईरान अपनी रक्षात्मक नीति छोड़कर पूरी तरह आक्रामक सैन्य अभियान शुरू कर देगा.
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने शनिवार को अमेरिका के खाड़ी सहयोगी देशों और जॉर्डन पर मिसाइलों और ड्रोन से जबरदस्त हमले किए. जॉर्डन में हुए इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की जान भी चली गई.
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