Rahu Ketu Gochar 2024: नवग्रहों में राहु-केतु को अशुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में इन दोनों ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, उन्हें जीवन में कभी भी किसी चीज की परेशानी नहीं होती है। वहीं इन दोनों के कमजोर होने से जीवन में उथल-पुथल मची रहती है। इस समय 12 में से किसी एक राशि के लोगों के ऊपर राहु-केतु की अशुभ दृष्टि पड़ रही है, जिसके कारण उन्हें 31 अगस्त 2024 तक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कोई भी चीज उन्हें आसानी से नहीं मिलेगी। बिजनेस में नुकसान होने के साथ-साथ सेहत से जुड़ी समस्याओं के होने का खतरा भी बना रहेगा।
आज पंडित सुरेश पांडेय आपको उस एक राशि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें राहु-केतु से बचकर रहना होगा। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आने वाले दिन आपके लिए अच्छे रहेंगे या नहीं, तो इसके लिए ये वीडियो जरूर देखें।
ये भी पढ़ें- आज से 12 राशियों पर होगी पैसों की बरसात! पंडित सुरेश पांडेय से जानें नवग्रहों को मजबूत करने के उपाय
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
संबंधित खबरें
IND vs WI: टीम इंडिया को चौथे T20 मुकाबले में जीता सकते हैं ये 5 खिलाड़ी
1 hr agoनवरात्रि में कैसे करनी चाहिए पूजा? पंडित सुरेश पांडेय ने बताया सही तरीका
4 hrs agoवेस्टइंडीज के खिलाफ तूफानी अर्धशतक से अभिषेक शर्मा ने तोड़े 7 बड़े रिकॉर्ड
5 hrs agoनवरात्रि व्रत के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल
6 hrs agoयूपी कांग्रेस की कमान संभालते ही आराधना मिश्रा ने दिया ये बड़ा बयान
19 hrs agoआज जरूर करें गणेश जी और नवग्रहों की स्थापना, यहां जानिए
1 day agoIND vs WI मैच में फिर बन सकते हैं 500 से ज्यादा रन, पिच दे रही संकेत
1 day agoरसोई में मौजूद मसालों से जुड़े ज्योतिषीय उपाय, बन सकेंगे आपके काम
1 day agoप्रदर्शनकारियों के लिए गुड न्यूज! अब कांग्रेस के वकील लड़ेंगे आपका केस
1 day agoटीम इंडिया के नए चीफ सिलेक्टर की रेस में सामने आए 3 बड़े नाम
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines