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'सरकार चोट लगने के बाद मरहम पर तो ध्यान दे रही लेकिन...' एंटी पेपर लीक बिल पर क्या बोले CJP प्रवक्ता?

केंद्र सरकार के एंटी पेपर लीक बिल पर सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका का बयान सामने आया है. उन्होंने सरकार के बिल पर सवाल उठाए हैं.

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कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया गया. इसके बाद केंद्र सरकार एंटी पेपर लीक बिल लेकर आई है. इस बिल को लेकर सीजेपी प्रवक्ता ने सवाल उठाएं हैं. उन्होंने कहा, सवाल अभी भी वही है कि पेपर लीक रोका कैसे जाए? पेपर लीक होने के बाद तो आप सजा दे रहे हैं, लेकिन पेपर लीक रोका कैसे जाए, इस पर आपने कितनी बात की है?

उन्होंने आगे कहा, सरकार चोट लगने के बाद मरहम पर तो ध्यान दे रही है, लेकिन चोट ना लगे इस पर ध्यान नहीं दे रही है. हमने पहले दिन से कहा है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट्स, पेनल्टीज, सजा सिर्फ ये सफिशिएंट नहीं है. आप अगर पेपर लीक रोकना चाहते हैं, तो आपकी इसकी जड़ तक जाना होगा. जो बिल्स के हमने प्रोविजंस पढ़े हैं, तो उससे हमें यही समझ में आ रहा है कि बिल में बहुत ज्यादा फोकस इस बात पर है कि पेपर लीक होने के बाद किस तरह की सजा हो. सजा में प्रावधान बढ़ गया है, पेनल्टी बढ़ाई गई है. लेकिन सवाल अभी भी वही है कि पेपर लीक रोका कैसे जाए? पेपर लीक होने के बाद तो आप सजा दे रहे हैं. लेकिन पेपर लीक रोका कैसे जाए? इस पर आपने कितनी बात की है? आपने क्या वेंडर्स को ब्लैक लिस्टिंग करने प कुछ बात की है? किस तरह से हमारे पूरे सिस्टम को डिजिटाइज किया जाए. किस तरह से हम साइबर सिक्योरिटी एनहांस करें. ब्लॉकचेन हम इनकॉर्पोरेट करें.

रांका ने कहा, जो हमारे एग्जाम सेंटर्स हैं उनको स्ट्रेंथन करें. एंड टू एंड मार्किंग करके किस तरह से पेपर लीकेज को रोके उस पर अभी तक इस पेपर बिल में बात नहीं की गई है. जिससे यह साबित होता है कि सरकार चोट लगने के बाद मरहम पर तो ध्यान दे रही है लेकिन चोट ना लगे इस पर ध्यान नहीं दे रही है. हमने पहले दिन से कहा है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट्स, पेनल्टीज, सजा सिर्फ यह सफिशिएंट नहीं है. आप अगर पेपर लीक रोकना चाहते हैं तो आपको इसकी जड़ तक जाना होगा.

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उन्होंने कहा, स्ट्रक्चरल इश्यूज जो हैं सिस्टम में उनको सॉल्व करना होगा. अगर पैलेट गंस का इस्तेमाल हुआ है तो सरकार को इस बारे में सफाई देनी होगी. जो भी हम तमाम मीडिया रिपोर्ट्स पढ़ रहे हैं उसमें साफ हो रहा है कि बुकलॉग्स में नोटेड है कि पैलेट गंस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी. तो सरकार को क्लियर करना पड़ेगा.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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