क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कल आपको कुछ हो जाए, तो आपके फोन में बंद आपकी यादें, गूगल ड्राइव पर रखे जरूरी डॉक्यूमेंट्स, इंस्टाग्राम रील्स और ईमेल का क्या होगा? क्या आपकी फैमिली आपकी उन प्यारी तस्वीरों और फाइलों को देख पाएगी या वे हमेशा के लिए इंटरनेट के अंधेरे में खो जाएंगी?
हमारे देश (भारत) में मकान, दुकान और जमीन-जायदाद के लिए तो उत्तराधिकार कानून (Indian Succession Act, 1925) मौजूद है, लेकिन आपके डिजिटल खातों (Digital Accounts) के लिए कोई अलग और पक्का कानून नहीं है. आईटी एक्ट-2000 भी इस बात पर खामोश है कि किसी यूजर की मौत के बाद उसके ऑनलाइन अकाउंट्स का क्या किया जाए.
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपने जीते जी सही सेटिंग नहीं की, तो आपकी फैमिली के लिए आपके Google, Apple या सोशल मीडिया का एक्सेस पाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. जानिये अलग-अलग टेक कंपनियां इस स्थिति में क्या करती हैं और आज ही आपको कौन-सी 3 सेटिंग्स कर लेनी चाहिए.
अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर आपके अकाउंट्स का क्या होता है?
गूगल (Google, Gmail, Photos, YouTube)
गूगल के पास सबसे शानदार फीचर है- इनेक्टिव अकाउंट मैनेजर (Inactive Account Manager). अगर आपका अकाउंट आपके तय किए गए समय (3 से 18 महीने) तक इनएक्टिव रहता है, तो गूगल आपके चुने हुए 10 भरोसेमंद दोस्तों या परिजनों को एक डाउनलोड लिंक भेज देगा.
इससे आपकी फैमिली आपके जीमेल, गूगल ड्राइव और फोटोज का बैकअप ले सकेगी. अगर आपने यह सेट नहीं किया, तो गूगल समय के साथ अकाउंट को हमेशा के लिए डिलीट भी कर सकता है.
मेटा (Facebook, Instagram & WhatsApp)
Facebook में दो रास्ते हैं. पहला, आप अपनी लाइफ में ही एक लेगेसी कॉन्टैक्ट (Legacy Contact) चुन सकते हैं. आपकी मौत के बाद वह व्यक्ति आपके अकाउंट को मेमोरियल (यादगार) पेज में बदल सकता है, नया फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर सकता है, लेकिन आपके पर्सनल मैसेज (DMs) नहीं पढ़ सकता.
Instagram में लेगेसी कॉन्टैक्ट का ऑप्शन नहीं मिलता. परिजन सबूत देकर इसे केवल मेमोरियल पेज बनवा सकते हैं या अकाउंट डिलीट करवा सकते हैं. WhatsApp के मैसेज सर्वर पर नहीं, बल्कि आपके फोन में सेव होते हैं. यानी अगर परिवार के पास फोन का लॉक पिन है, तो ही मैसेज पढ़े जा सकते हैं.
एपल (Apple & iCloud)
एपल का डिजिटल लेगेसी (Digital Legacy) प्रोग्राम बहुत सख्त है. आप अपने एपल आईडी में 5 लेगेसी कॉन्टैक्ट जोड़ सकते हैं, जिन्हें एक स्पेशल एक्सेस की (Access Key) मिलती है. आपके जाने के बाद डेथ सर्टिफिकेट और उस key की मदद से वे आपके आईक्लाउड फोटोज और नोट्स डाउनलोड कर सकते हैं. अगर लेगेसी कॉन्टैक्ट सेट नहीं है, तो कोर्ट ऑर्डर के बाद भी एपल किसी को एक्सेस नहीं देता.
पासवर्ड और फोन के लॉक का असली गणित
बहुत से परिवार सिर्फ इस भरोसे रहते हैं कि फोन का पिन पता है तो काम हो जाएगा. लेकिन किसी दूसरे का अकाउंट उनकी आईडी से लॉग इन करना तकनीकी रूप से नियमों का उल्लंघन है.
पासवर्ड मैनेजर (Password Manager): सबसे सेफ और बेस्ट तरीका यह है कि आप Bitwarden या 1Password जैसे पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करें. अपने इस ‘डिजिटल वॉल्ट’ का मास्टर पासवर्ड एक सीलबंद लिफाफे में अपनी वसीयत के साथ रख दें.
फोन का लॉक: अगर फोन लॉक है और परिवार को उसका पासवर्ड या पिन नहीं पता, तो एपल या गूगल जैसी कंपनियां फोन अनलॉक करने में कोई मदद नहीं करेंगी.
आज ही 30 मिनट में निपटाएं ये 3 जरूरी काम
आपको किसी वकील या नोटरी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, बस आज ही अपने फोन से ये 3 काम कर लें:
- गूगल इनएक्टिव अकाउंट मैनेजर चालू करें: गूगल अकाउंट की सेटिंग्स में जाएं, Inactive Account Manager खोजें और अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति का नाम/ईमेल जोड़ दें.
- Apple ID में लेगेसी कॉन्टैक्ट जोड़ें: अगर आप आईफोन यूजर हैं, तो लेगेसी कॉन्टैक्ट जोड़कर उसकी एक्सेस की (Key) का प्रिंटआउट ले लें और जरूरी पेपर्स के साथ रख दें.
- सीलबंद लिफाफे वाला फॉर्मूला: एक डायरी या कागज पर अपने फोन का पिन और पासवर्ड मैनेजर का मास्टर पासवर्ड लिखें. इसे लिफाफे में बंद करके सील कर दें और घर के किसी एक जिम्मेदार व्यक्ति को बता दें कि यह कहां रखा है.