उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड और मकर संक्रांति, पोंगल व लोहड़ी के त्योहारों को देखते हुए दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों में स्कूलों की छुट्टियों को लेकर ताजा आदेश जारी किए गए हैं. जनवरी 2026 के लिए राज्यवार स्कूलों की छुट्टियों की सूची यहां देखें:
दिल्ली और NCR (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम)
दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में शीतकालीन अवकाश (Winter Vacation) को ठंड के कारण आगे बढ़ा दिया गया है. शिक्षा निदेशालय (DoE) के अनुसार, दिल्ली के सभी सरकारी और निजी स्कूल 15 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे. स्कूल 16 जनवरी (शुक्रवार) को फिर से खुलेंगे.
नोएडा और गाजियाबाद (UP): जिलाधिकारी के आदेशानुसार, कक्षा 8 तक के स्कूल 15 जनवरी तक बंद हैं. बड़ी कक्षाओं (9-12) के लिए समय में बदलाव किया गया है (सुबह 10 बजे से).
गुरुग्राम और फरीदाबाद (हरियाणा): हरियाणा सरकार ने भी सभी स्कूलों में 15 जनवरी तक सर्दियों की छुट्टियां घोषित की हैं.
उत्तर प्रदेश (UP) – मकर संक्रांति की छुट्टी में बदलाव
योगी सरकार ने मकर संक्रांति की छुट्टी की तारीख में बड़ा बदलाव किया है. पहले मकर संक्रांति की छुट्टी 14 जनवरी को थी, लेकिन अब इसे बदलकर 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) कर दिया गया है. इस दिन पूरे राज्य में स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर और बैंक बंद रहेंगे. कुछ जिलों में कड़ाके की ठंड के कारण 14 जनवरी को भी स्थानीय अवकाश या विंटर वेकेशन के कारण स्कूल बंद हो सकते हैं.
लोहड़ी (13 जनवरी) के अवसर पर पंजाब के स्कूलों में पहले से ही अवकाश है. कुछ जिलों में ठंड के कारण विंटर वेकेशन को 15 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है. हरियाणा में भी 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित है, जिससे लोहड़ी और मकर संक्रांति दोनों त्योहार छुट्टियों के दायरे में आ गए हैं.
- दिल्ली : 15 जनवरी तक (विंटर वेकेशन), स्कूल 16 जनवरी को खुलेंगे
- उत्तर प्रदेश: 15 जनवरी (गुरुवार) तक सार्वजनिक अवकाश घोषित
- हरियाणा: 15 जनवरी तक (विंटर वेकेशन) छुट्टी. लोहड़ी (13 जन) भी छुट्टी के दायरे में
- पंजाब: 13 और 14 जनवरी को लोहड़ी और मकर संक्रांति अवकाश
- तमिलनाडु: 15 से 17 जनवरी तक पोंगल के लिए तीन दिन का अवकाश
- कर्नाटक: 15 जनवरी को मकर संक्रांति की छुट्टी
मौसम का असर:
अगर ठंड और कोहरा इसी तरह बना रहा, तो 15 जनवरी के बाद भी प्राथमिक कक्षाओं (Nursery to 5th) के लिए छुट्टियां आगे बढ़ाई जा सकती हैं. निजी स्कूल कभी-कभी अपने स्तर पर भी फैसले लेते हैं, इसलिए अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे स्कूल के आधिकारिक वॉट्सएप ग्रुप या नोटिस बोर्ड को जरूर चेक करें.