निर्वाचन आयोग ने रविवार को असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया. इनमें सबसे बड़ा बदलाव पश्चिम बंगाल को लेकर है, जहां इस बार मतदान केवल दो चरणों में होगा. 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले इस मतदान से राज्य की 294 सीटों पर किसकी ताजपोशी होगी, यह तय हो जाएगा. पिछले विधानसभा चुनाव-2021 में आठ चरणों में करीब एक महीने तक चले मतदान की तुलना में यह कदम काफी महत्वपूर्ण है.
2021 के चुनावों में बंगाल में पहला चरण 27 मार्च से शुरू होकर आखिरी चरण 29 अप्रैल तक चला था. उस समय लंबे समय तक फैले मतदान ने राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मतदाताओं पर भारी बोझ डाला था. मीडिया के सवाल पर आयोग ने स्पष्ट किया कि संख्या घटाकर दो चरणों तक लाई गई है ताकि सभी पक्षों को सुविधा हो. आयोग के अधिकारियों ने कहा, ‘दोनों पक्षों की सुविधा के लिए चरणों की संख्या को कम किया गया है.’
इस फैसले के पीछे कई ठोस कारण हैं. सबसे पहले, राजनीतिक दलों और नेताओं की लंबे समय से मांग थी कि बहु-चरणीय चुनाव लंबी मुहिम चलाने, भारी खर्च और शारीरिक थकान का कारण बनते हैं. कई नेता इसे वित्तीय रूप से बोझिल और मतदाताओं के लिए ऊबाऊ बताते रहे हैं. आयोग ने हाल ही में बंगाल का दो दिवसीय दौरा किया, जहां विभिन्न दलों से चरणों की संख्या पर विस्तृत चर्चा हुई. इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया.
एक प्रमुख कारक मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल भी है, जो 7 मई को समाप्त हो रहा है. संवैधानिक प्रावधानों के तहत चुनाव इसी अवधि से पहले पूरे करने जरूरी हैं, ताकि शासन की निरंतरता बनी रहे. इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था ने भी अहम भूमिका निभाई. बंगाल में हमेशा से तीखी राजनीतिक लड़ाई होती रही है. ऐसे में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र से करीब 480 बटालियन सुरक्षा बल पहले ही तैनात कर दिए गए हैं. इन बलों की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी.