2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर जारी चुनावी सरगर्मी के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दुर्गापुर पहुंचीं, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की एक विशाल चुनावी सभा को संबोधित किया.
इस दौरान ममता बनर्जी ने पश्चिम बर्धमान जिले की 9 अहम विधानसभा सीटों—पांडवेश्वर, दुर्गापुर पूर्व, दुर्गापुर पश्चिम, रानीगंज, जमुरिया, आसनसोल दक्षिण, आसनसोल उत्तर, कुल्टी और बाराबनी—के तृणमूल उम्मीदवारों के समर्थन में जोरदार प्रचार किया और जनता से उनके पक्ष में वोट करने की अपील की.
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सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने एसआईआर (SIR) के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, तृणमूल कांग्रेस उनके साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा करेगी.
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हालांकि, इस सभा की सबसे ज्यादा चर्चा उनके एक बयान को लेकर हो रही है, जिसे विपक्ष “फिसली जुबान” बता रहा है. अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी अचानक धार्मिक संदर्भों पर बोलने लगीं.
उन्होंने कहा कि छठ पूजा के दौरान 'बिहारी लोग लिट्टी और ठेकुआ खाते हैं और मुझे भी देते हैं, मैं भी वहां जाती हूं.'
इसके अलावा उन्होंने मंच से यह भी कहा कि '2026 के अगस्त-सितंबर तक दिल्ली से भाजपा सरकार चली जाएगी और तब देखा जाएगा कि जो लोग भाजपा के लिए दलाली कर रहे हैं और लोगों के अधिकार छीन रहे हैं, उनका क्या होता है. धर्म के नाम पर भी न्याय होता है, अधर्म करने वालों को सजा जरूर मिलती है.'
मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्ष इन टिप्पणियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि तृणमूल की ओर से इसे संदर्भ से जोड़कर देखने की बात कही जा रही है.
अब देखना यह होगा कि चुनावी माहौल में ममता बनर्जी के इन बयानों का राजनीतिक असर कितना पड़ता है.