बाबरी जैसी मस्जिद बनाने की मंशा के पीछे बांग्लादेश तो नहीं? घोषणा से पहले ढाका से लौटे थे हुमायु कबीर

Babri like Masjid IN Murshidabad: पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र के बेलडांगा इलाके में 6 दिसंबर को बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखे जाने की हुमायु कबीर की घोषणा के पीछे कहीं बांग्लादेश का समर्थन तो नहीं? तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक हुमायु कबीर के बांग्लादेश दौरे के बाद बदले रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जोरों पर हैं. पढ़ें, कोलकाता से अमर देव पासवान की रिपोर्ट

Humayun Kabir returned Dhaka

Babri like Masjid IN Murshidabad: तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक हुमायु कबीर मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद बनाने की जिद पर अड़ने से पहले बांग्लादेश के 11 दिवसीय दौरे पर गए थे. सूत्रों के अनुसार, हुमायु कबीर 28 सितंबर 2025 को कोलकाता एयरपोर्ट से बांग्लादेश रवाना हुए थे और ढाका एयरपोर्ट पर उतरे. इस दौरान उन्होंने ढाका, कॉक्स बाजार, ढाकेश्वरी मंदिर सहित कई स्थानों का भ्रमण किया. खबर है कि इस यात्रा के दौरान उनकी वहां की कुछ नामचीन हस्तियों से मुलाकात और बातचीत भी हुई. सूत्रों के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2025 को वे चार पहिया वाहन से मालदा के मेहदीपुर बॉर्डर के रास्ते भारत लौटे. इसके बाद वे अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में जुट गए. ठीक एक महीना 11 दिन बाद, 20 नवंबर को उन्होंने मीडिया के सामने आकर मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की और 6 दिसंबर को उसकी नींव रखने का ऐलान किया. अब राजनीतिक हलकों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि बाबरी मस्जिद निर्माण के पीछे कहीं बांग्लादेश का समर्थन तो नहीं है.

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अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये

बताया जा रहा है कि इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये है. खुद हुमायु कबीर कई मंचों से यह कह चुके हैं कि उन्हें मस्जिद निर्माण के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी चंदा मिल रहा है. उन्होंने कुछ चंदों से जुड़े वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किए हैं. हालांकि, हुमायु कबीर ने मीडिया के सामने अपने बांग्लादेश दौरे की बात स्वीकार की है, लेकिन बाबरी मस्जिद निर्माण को मिल रहे समर्थन के पीछे किन-किन लोगों या संगठनों का हाथ है, इस पर उन्होंने अब तक कोई स्पष्ट खुलासा नहीं किया है. उनका कहना है कि वे कैमैक स्ट्रीट के निर्देश पर 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक बांग्लादेश में थे, लेकिन इस दौरे और मस्जिद निर्माण के बीच किसी भी तरह के सीधे संबंध को लेकर वे चुप्पी साधे हुए हैं.

4 दिसंबर को हुमायु कबीर तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित

मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद बनाने की मंशा सार्वजनिक कर हुमायु कबीर न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए. उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों को तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका मिल गया और कई राजनीतिक दलों व संगठनों ने उनके फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया. पार्टी की बढ़ती किरकिरी को देखते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हुमायु कबीर से दूरी बनानी शुरू कर दी. तृणमूल के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाने की कोशिश की और निर्णय वापस लेने के लिए बातचीत भी हुई, लेकिन हुमायु कबीर अपनी जिद पर अड़े रहे. अंततः 4 दिसंबर को तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया.

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पार्टी से निष्कासन के बाद भी तेवर नरम नहीं पड़े

पार्टी से निष्कासन के बाद भी हुमायु कबीर के तेवर नरम नहीं पड़े. 22 दिसंबर को उन्होंने एक नई राजनीतिक पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ के गठन की घोषणा कर दी. उन्होंने दावा किया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में बंगाल की 294 में से 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे. साथ ही यह भी कहा कि यदि कोई अन्य दल उनके साथ गठबंधन करता है तो शेष सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी, अन्यथा उनकी पार्टी सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी. हुमायु कबीर का यह भी कहना है कि उनकी नई पार्टी को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है और बाबरी जैसी मस्जिद के निर्माण के लिए चंदा भी प्राप्त हो रहा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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